
कोलकाता: दुर्गा पूजा की महासप्तमी की शाम पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदयविदारक हादसे में बदल गई। उत्तर कोलकाता स्थित विख्यात चोरबागान सार्वजनीन पूजा पंडाल में भारी भीड़ और अचानक बदले मौसम के बीच पंडाल का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। ढांचे के ढहते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। इस भीषण हादसे में अब तक 19 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 25 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में एक-दो की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घटना के तुरंत बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चोरबागान पूजा समिति के महासचिव सहित अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
अस्पताल पहुंचे सीएम, राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी
हादसा होते ही स्थानीय लोगों, पूजा आयोजकों, पुलिस, फायर ब्रिगेड और राज्य आपदा प्रबंधन की टीमों ने तेजी से बचाव अभियान शुरू किया। मलबे और भगदड़ में फंसे लोगों को फौरन बाहर निकालकर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल सीधे अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को घायलों के समुचित एवं त्वरित इलाज के कड़े निर्देश दिए।
बारिश, भीड़ और निकासी द्वार पर अफरा-तफरी
कोलकाता पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर की शाम करीब 7:40 बजे तेज बारिश और श्रद्धालुओं के अत्यधिक दबाव के बीच शारदा पार्क पूजा पंडाल के निकास द्वार (एग्जिट गेट) पर यह भगदड़ शुरू हुई। एहतियात बरतते हुए फिलहाल चोरबागान पंडाल को आम जनता के दर्शन के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके अलावा प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद ताला प्रतॉय पंडाल को भी बंद करा दिया गया, जबकि चेतला अग्रणी पंडाल में दर्शनार्थियों की आवाजाही को लगभग एक घंटे तक रोक दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने दिए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश, कल के सभी कार्यक्रम किए रद्द
हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि शाम करीब 7:30 से 8 बजे के बीच यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि क्लब द्वारा लाउडस्पीकर पर की गई एक घोषणा के बाद अचानक अफरा-तफरी मची, जिससे लोगों का दम घुटने लगा और भगदड़ फैल गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता घायलों का जीवन बचाना और शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाना है। मुख्यमंत्री ने हादसे की तह तक जाने के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोलकाता पुलिस को सुरक्षा में तैनात कर्मियों और पूजा समिति के पदाधिकारियों से पूछताछ करने तथा सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को कहा गया है। फिलहाल स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), फोरेंसिक विशेषज्ञ और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल पर गहन जांच कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने अपने अगले दिन के सभी पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम भी रद्द कर दिए हैं और सभी पूजा कमेटियों को एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स की कमियां तत्काल दूर करने की नसीहत दी है।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने जताया शोक; मुआवजे का एलान
इस भयावह त्रासदी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गहरा दुख जताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर तीव्र संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन हर संभव सहायता मुहैया करा रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की गई है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रवि ने भी जानमाल के नुकसान पर गहरी संवेदना प्रकट की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से फोन पर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। गृह मंत्री ने अपने कल के सभी राज्य दौरे स्थगित करते हुए अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात करने की बात कही है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया खौफनाक मंजर, सरकार ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
हादसे के मद्देनजर पश्चिम बंगाल सरकार ने परिजनों की सुविधा और जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया है। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पंडाल में क्षमता से कहीं अधिक भीड़ थी। पंडाल का हिस्सा गिरते ही चीख-पुकार मच गई और कई लोग बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। एंबुलेंस की कमी के चलते स्थानीय युवकों ने बेहोश लोगों को अपनी बाइकों पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाया।
पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा आघात व्यक्त करते हुए मां दुर्गा से पीड़ित परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। वहीं, टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि पहला लक्ष्य लोगों की जान बचाना है। उन्होंने पंडाल भ्रमण पर निकले लोगों से चोरबागान इलाके की ओर न जाने की अपील की। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस पूरी घटना को लेकर राज्य पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। टीएमसी का आरोप है कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर न तो पर्याप्त पुलिस बल था, न सिविक वॉलंटियर्स मौजूद थे और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस या भीड़ नियंत्रण की कोई ठोस योजना थी।
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