
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो बहुचर्चित हत्याकांडों में अदालतों द्वारा दिए गए सख्त फैसलों ने कानून और न्याय व्यवस्था की नजीर पेश की है। मेरठ की अदालतों ने महज 48 घंटे के भीतर दो अलग-अलग मामलों में चार दोषियों को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाकर कड़ा संदेश दिया है। इन ऐतिहासिक फैसलों के बाद पति की हत्या के आरोप में मेरठ और आसपास की जेलों में बंद अन्य महिला बंदियों की बेचैनी अचानक बढ़ गई है। हालात को भांपते हुए जेल प्रशासन ने संबंधित महिला कैदियों की 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए हैं, साथ ही उनका मानसिक तनाव कम करने के लिए विशेष काउंसिलिंग सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है।
2025 के सौरभ और अमित हत्याकांड: प्रेम प्रसंग में रची गई थी पतियों की खौफनाक मौत की पटकथा
वर्ष 2025 में मेरठ के ब्रह्मपुरी में हुए सौरभ हत्याकांड और बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में हुए अमित हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। लगभग एक महीने के अंतराल पर हुईं इन दोनों वारदातों में पत्नियों ने अपने प्रेमियों के साथ मिलकर अपने ही पतियों को बेहद बर्बर तरीके से मौत के घाट उतारा था। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोनों मामलों की मजबूत चार्जशीट अदालत में पेश की, जिसके आधार पर कोर्ट ने इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ अपराध मानते हुए दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का फैसला सुनाया।
लाश नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से चिनी, दूसरे में खेत में दबाया शव
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के चर्चित सौरभ हत्याकांड में अदालत ने दोषी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। इस जघन्य वारदात में हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए सौरभ के शव को एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में बंद कर ऊपर से सीमेंट का घोल भरकर चिन दिया गया था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की कि यह अपराध अत्यंत क्रूर, अमानवीय और बर्बर श्रेणी का है। वहीं, बहसूमा के अकबरपुर सादात निवासी अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप हत्याकांड में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड का फैसला सुनाया। मुजफ्फरनगर के सैदपुरा गांव निवासी रविता ने 13 अप्रैल 2025 को अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था।
ढाई दशक में पश्चिमी यूपी की पांच महिलाओं को मिली फांसी की सजा
मेरठ के इन दोनों फैसलों के साथ ही पिछले ढाई दशक के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पांच ऐसी महिला अपराधियों का रिकॉर्ड सामने आया है, जिन्हें उनके नृशंस अपराधों के लिए फांसी की सजा सुनाई गई। इनमें से तीन महिला दोषियों का सीधा संबंध मुजफ्फरनगर जनपद से रहा है:
-
सोनिया (रेलूराम पूनिया हत्याकांड, 2001): हरियाणा के बरवाला से पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के आठ लोगों की 23 अगस्त 2001 को लितानी गांव स्थित फार्महाउस में सामूहिक हत्या कर दी गई थी। मुजफ्फरनगर के सिसौली निवासी संजीव कुमार की पत्नी और पूर्व विधायक की बेटी सोनिया को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में तब्दील किया गया।
-
शबनम (बावनखेड़ी नरसंहार, 2008): अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव में अप्रैल 2008 की रात शबनम ने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के सात मासूम व बुजुर्ग सदस्यों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। सत्र अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने दोनों की फांसी की सजा को बरकरार रखा।
-
मुकेश उर्फ बिट्टो (शेखर हत्याकांड, 2019): मुजफ्फरनगर के भौराकलां थाना क्षेत्र के खेड़ी सूंडियान गांव में 17 जून 2019 को किसान शेखर की महज 70 हजार रुपये के लेनदेन विवाद में ईंटों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 ने दोषी महिला मुकेश उर्फ बिट्टो और उसके तीन बेटों प्रदीप, संदीप व सोनू को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
-
मुस्कान रस्तोगी (सौरभ हत्याकांड, 2025): मेरठ के ब्रह्मपुरी में पति सौरभ की हत्या कर शव को ड्रम में सीमेंट से चिनवाने के जुर्म में अदालत द्वारा फांसी की सजा।
-
रविता (अमित हत्याकांड, 2025): बहसूमा के अकबरपुर सादात में प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर पति अमित की नृशंस हत्या करने के जुर्म में अदालत द्वारा मृत्युदंड की सजा।
जेलों में हाई अलर्ट, महिला बैरकों में बढ़ाई गई सुरक्षा
दोनों मामलों में एक के बाद एक आए फांसी के फैसलों के बाद जेल के भीतर बंद उन महिला बंदियों के होश उड़े हुए हैं जो पारिवारिक विवाद या पतियों की हत्या के मामलों में विचारधीन कैदी के तौर पर बंद हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, कई महिला बंदियों में अवसाद और घबराहट के लक्षण देखे गए हैं। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बैरकों में महिला प्रहरियों की तैनाती बढ़ाई गई है और जेल डॉक्टरों व मनोवैज्ञानिकों की मदद से उनकी काउंसिलिंग कराई जा रही है।
voice of india