Wednesday , 21 October 2026

US Green Card: टीसीएस, इंफोसिस और माइक्रोसॉफ्ट समेत 8 टेक दिग्गजों पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा चाबुक; PERM प्रोग्राम निलंबित, भारतीय आईटी पेशेवरों की बढ़ी धड़कनें

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना संजोए बैठे हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों को तगड़ा झटका लगा है। अमेरिकी प्रशासन ने तकनीकी जगत की आठ दिग्गज कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई की जद में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी जैसी दिग्गज कंपनियां आई हैं। इस कड़े कदम के बाद इन कंपनियों की ओर से दाखिल होने वाली नई PERM अर्जियों पर पूरी तरह रोक लग गई है, जबकि पहले से लंबित आवेदनों की फाइलें भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला प्रशासन विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने वाली कंपनियों की गहन जांच कर रहा है। प्रशासन का सीधा आरोप है कि कंपनियां स्थानीय प्रतिभाओं की अनदेखी कर वीजा नियमों का दुरुपयोग कर रही हैं। ऐसे में एच-1बी वीजा के सहारे ग्रीन कार्ड की कतार में खड़े भारतीय इंजीनियरों के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

किन आठ कंपनियों पर गिरी गाज और क्या कहा श्रम विभाग ने? अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, छह प्रमुख आईटी कंपनियों—कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को सीधे तौर पर पीईआरएम प्रक्रिया से निलंबित किया गया है। वहीं टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी के खिलाफ चल रही संघीय जांच को आधार बनाते हुए यह रोक लगाई गई है। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने स्पष्ट किया कि निलंबन अवधि के दौरान इन कंपनियों से जुड़ा कोई भी नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा जो अर्जियां पहले से विभाग के पास लंबित हैं, उन पर भी समीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह रोक दी गई है।

क्या होता है PERM प्रोग्राम और ग्रीन कार्ड में इसकी अहमियत? परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) दरअसल अमेरिकी श्रम विभाग की वह अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके जरिए नियोक्ता कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी देने और उनके रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की राह तैयार करती हैं। कानूनन, किसी भी अमेरिकी कंपनी को पहले यह प्रमाणित करना होता है कि जिस पद पर विदेशी पेशेवर को रखा जा रहा है, उसके लिए योग्य, इच्छुक और सक्षम अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है। इसके लिए निर्धारित गाइडलाइंस के तहत पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया चलानी पड़ती है। जब श्रम विभाग यह प्रमाण पत्र जारी करता है, तभी कर्मचारी के ग्रीन कार्ड का अगला चरण शुरू होता है। हालांकि, PERM मंजूरी मिलने का अर्थ तुरंत ग्रीन कार्ड मिलना नहीं होता, बल्कि यह एक लंबी कानूनी प्रक्रिया का शुरुआती और बेहद अहम पड़ाव है।

क्या H-1B वीजा पर भी लग गई है रोक? अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले को लेकर फैले भ्रम के बीच यह स्पष्ट किया गया है कि इन टेक कंपनियों में कार्यरत पेशेवरों का H-1B वीजा रद्द नहीं हुआ है और न ही नए वीजा पर सीधे तौर पर कोई पाबंदी लगी है। H-1B वीजा और PERM दोनों पूरी तरह भिन्न कानूनी प्रक्रियाएं हैं। H-1B वीजा विदेशी कुशल कामगारों को अमेरिका में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है, जबकि PERM रोजगार आधारित स्थायी नागरिकता (ग्रीन कार्ड) का आधार बनता है। वर्तमान आदेश का सीधा असर केवल नई और अटकी हुई PERM याचिकाओं पर है। किसी कर्मचारी के मौजूदा वीजा स्टेटस या नौकरी पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह पूरी तरह व्यक्तिगत स्थिति और इमिग्रेशन नियमों पर निर्भर करता है।

भारतीय टेक पेशेवरों के करियर पर क्या पड़ेगा सीधा असर? अमेरिका के आईटी सेक्टर की रीढ़ मानी जाने वाली भारतीय कंपनियां बड़ी तादाद में घरेलू पेशेवरों को अमेरिकी प्रोजेक्ट्स में तैनात करती हैं। इस निलंबन से सबसे ज्यादा प्रभावित वही पेशेवर होंगे जिनकी ग्रीन कार्ड फाइलिंग प्रक्रियाधीन थी। जिन कर्मचारियों का PERM आवेदन अभी जमा नहीं हुआ था, उनका प्रोसेस अब कंपनियों की बहाली तक रुका रहेगा। वहीं जिनकी फाइलें पहले से पेंडिंग हैं, उनका मामला भी अधर में लटक जाएगा। इस प्रशासनिक गतिरोध से ग्रीन कार्ड हासिल करने की समयसीमा काफी लंबी खिंच सकती है, जिससे कर्मचारियों के लिए नौकरी में बदलाव, परिवार की सुरक्षा और भविष्य की वित्तीय योजनाएं तय करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। हालांकि, जिन लोगों की PERM प्रक्रिया पहले ही स्वीकृत हो चुकी है और वे आगे के चरणों में हैं, उनके आवेदन रद्द नहीं माने जाएंगे।

माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के तीखे आरोप अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर H-1B वीजा नियमों की मूल भावना को आहत करने का आरोप लगाया है। वेंस के मुताबिक, इस वीजा व्यवस्था का निर्माण केवल उन खास पदों को भरने के लिए हुआ था जिनके लिए अमेरिकी कार्यबल उपलब्ध न हो, लेकिन कंपनियां इसका इस्तेमाल अमेरिकी पेशेवरों को हटाकर विदेशी कामगारों को लाने के लिए कर रही हैं। वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट का ब्योरा देते हुए दावा किया कि कंपनी ने वर्ष 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। इसके बावजूद उसी दौरान कंपनी को 6,000 से अधिक H-1B वीजा स्वीकृत हुए और उसने 3,682 PERM आवेदन लगाए। वेंस का आरोप है कि इन आवेदनों में से लगभग 1,000 पद उन्हीं प्रोफाइल से जुड़े थे जिनसे स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को हटाया गया था, ताकि कम लागत में काम कराया जा सके।

माइक्रोसॉफ्ट ने आरोपों को किया खारिज, दी यह सफाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दावों पर माइक्रोसॉफ्ट ने औपचारिक पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में फाइल किए गए करीब 6,000 H-1B आवेदनों में से 80 प्रतिशत आवेदन पहले से कार्यरत कर्मचारियों के वीजा विस्तार या स्टेटस बदलाव के थे, न कि नई भर्तियों के। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, बाकी नए आवेदन उन कुशल पेशेवरों के थे जो पहले से वैध तरीके से अमेरिका में मौजूद थे और यह संख्या अमेरिका में उनके कुल वर्कफोर्स का महज एक फीसदी है। कंपनी ने दोहराया कि वह स्थानीय अमेरिकी प्रतिभाओं को प्राथमिकता देती है और वर्कफोर्स में बड़ा हिस्सा अमेरिकी नागरिकों का है। साथ ही कंपनी ने दावा किया कि वह उद्योग जगत में प्रतिस्पर्धी और उच्च वेतन देती है तथा H-1B धारकों को भी समान काम के लिए उतना ही वेतन मिलता है जितना बाकी कर्मचारियों को।

अमेरिकी सरकार की जांच का दायरा और विदेशी कर्मचारियों की नौकरी का सच श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग के हवाले से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 2009 के बाद से इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कामगारों की मांग की, 2.30 लाख H-1B वीजा हासिल किए और एक लाख से ज्यादा PERM सर्टिफिकेशन लिए। ट्रंप प्रशासन अब इसी डेटा के आधार पर भर्ती नियमों और वीजा दुरुपयोग की विस्तृत जांच कर रहा है। हालांकि, जांच शुरू होने का मतलब अंतिम रूप से दोषी ठहराया जाना नहीं है। फिलहाल के आदेश से किसी भी विदेशी कर्मचारी की नौकरी तुरंत जाने का खतरा नहीं है क्योंकि यह रोक केवल स्थायी निवास की अर्जी तक सीमित है। फिर भी, भविष्य की अनिश्चितताओं से बचने के लिए प्रभावित कर्मचारियों को अपनी मौजूदा वीजा मियाद, PERM स्टेटस और कानूनी विकल्पों के लिए कंपनी के इमिग्रेशन सेल या कानूनी विशेषज्ञों से तुरंत परामर्श लेने की सलाह दी गई है।

 

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