
लखनऊ ब्यूरो: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस आलाकमान द्वारा किए गए बड़े संगठनात्मक फेरबदल पर सूबे का सियासी तापमान बढ़ गया है। कांग्रेस ने वरिष्ठ विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी के इस नए समीकरण पर विपक्षी दलों ने तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। योगी सरकार में पंचायती राज एवं अल्पसंख्यक कल्याण कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस बदलाव पर तंज कसते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों को मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की खुली चुनौती दी है।
‘बदलाव से कुछ हासिल नहीं होगा, मुस्लिम चेहरे को घोषित करें सीएम फेस’ शनिवार (3 अक्टूबर) को मीडिया से रूबरू होते हुए सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने कहा कि आराधना मिश्रा को कमान सौंपने या इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने से सूबे की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को घेरते हुए कहा कि यदि कांग्रेस सचमुच अल्पसंख्यकों की हितैषी बनती है, तो उसे किसी मुस्लिम नेता को औपचारिक रूप से उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करना चाहिए।
सपा और कांग्रेस ने मुसलमानों को केवल वोट बैंक समझा: राजभर मंत्री राजभर ने केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी पर भी दोहरा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मेरी यही खरी सलाह अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को भी है कि वे भी किसी मुस्लिम नेता को अपना सीएम प्रत्याशी बनाएं। राजभर ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद से अब तक सपा और कांग्रेस दोनों ने ही मुस्लिम समाज से झोली भरकर वोट बटोरे हैं, लेकिन जब सत्ता में वास्तविक हिस्सेदारी और नेतृत्व देने की बारी आती है, तो मुस्लिम समुदाय को हाशिए पर धकेल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में रूटीन संगठनात्मक फेरबदल होते रहते हैं, और कांग्रेस का यह नया कदम भी महज औपचारिकता है जिससे जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली।
महिला आरक्षण बिल के बहाने सपा-कांग्रेस के पाखंड पर साधा निशाना आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के संदर्भ में ओपी राजभर ने महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि यह वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हैं, जिन्होंने पूर्व में संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण विधेयक का पुरजोर विरोध किया था और उसे पारित नहीं होने दिया था। राजभर ने सवाल उठाया कि महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों को रोकने वाली ये पार्टियां आज किस नैतिक अधिकार से महिला नेतृत्व का ढिंढोरा पीट रही हैं और किस मुंह से आधी आबादी के बीच जाकर वोट मांगेंगी?
‘जागरूक महिलाएं अब चुनावी रण में मांगेंगी जवाब’ कैबिनेट मंत्री ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब पहले से कहीं अधिक जागरूक और सजग हो चुकी हैं। जब सपा और कांग्रेस के नेता चुनावी मैदान में उतरेंगे, तो महिलाएं उनसे सीधे सवाल पूछेंगी कि जब उनके हक और सशक्तिकरण के लिए आरक्षण का ऐतिहासिक कानून लाया जा रहा था, तब उन्होंने इसका विरोध क्यों किया था? उस समय समर्थन करने के बजाय रुकावटें क्यों पैदा की गईं? उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में एनडीए गठबंधन इन दोनों दलों के इस दोहरे चरित्र और पाखंड को जनता की अदालत में पूरी मजबूती से उजागर करेगा।
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