Friday , 23 October 2026

ई-चालान न भरने पर कट सकती है घर की बिजली? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, यूपी-दिल्ली में हजारों करोड़ का जुर्माना अटका

नई दिल्ली: देश में यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान तो धड़ल्ले से कट रहे हैं, लेकिन जुर्माने की वसूली की रफ्तार बेहद सुस्त है। इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद सख्त और अनोखा सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि ट्रैफिक चालान के बकाये को उपभोक्ताओं के बिजली बिल से जोड़ दिया जाए, ताकि बिजली कटने के डर से लोग समय पर जुर्माना भरें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक सुझाव और विचार-विमर्श का हिस्सा है, इसे अंतिम आदेश न माना जाए।

सिर्फ चालान काटना काफी नहीं, वसूली सबसे अहम: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने ई-चालान की प्रभावी वसूली को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि केवल चालान काटते रहना कोई समाधान नहीं है, मुख्य चुनौती इस जुर्माने को वसूलने की है। यदि चालान राशि बिजली बिल में जोड़ी जाएगी, तो कनेक्शन कटने के भय से लोग बकाया चुकाने को मजबूर होंगे। इसके साथ ही अदालत ने वाहन ट्रांसफर पर रोक, फिटनेस व पीयूसी ब्लॉक करने, ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने और अचानक चेकिंग में बकायेदार वाहनों को जब्त करने जैसे अन्य कड़े विकल्पों पर भी मंथन किया।

संसद के आंकड़े: दो साल में ढाई गुना बढ़ा देशभर का बकाया

संसद में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा रखे गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देशभर में बकाये की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। 2024 में देशभर में 8.19 करोड़ ई-चालान जारी किए गए, जिनसे 3,835 करोड़ रुपये वसूले गए, जबकि 9,098 करोड़ रुपये का जुर्माना बकाया रह गया। यह बकाया आंकड़ा 2022 में 3,668 करोड़ रुपये और 2023 में 6,654 करोड़ रुपये था, यानी महज दो वर्षों में बकाया राशि ढाई गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है।

यूपी में सबसे ज्यादा 2,386 करोड़ का बकाया, वसूली से चार गुना अधिक

उत्तर प्रदेश ई-चालान और बकाये दोनों ही मामलों में देश में शीर्ष पर है। वर्ष 2024 में पूरे देश के कुल चालानों में से करीब 19 फीसदी (1.54 करोड़) अकेले यूपी में कटे। राज्य में 541 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जबकि 2,386 करोड़ रुपये बकाया रह गए। यूपी का बकाया देश के कुल बकाये का लगभग 26 फीसदी है, जो वसूली गई राशि के मुकाबले करीब 4.4 गुना अधिक है। 2022 में जहां यूपी में 1,321 करोड़ रुपये बकाया थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,386 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

बिहार में चालान चार गुना, बकाये में साढ़े सात गुना का उछाल

बिहार में पिछले दो वर्षों में चालान जारी होने की गति में 3.7 गुना की वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2022 में राज्य में 7.2 लाख चालान जारी हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 26.7 लाख हो गए। हालांकि, वसूली 2023 के 334 करोड़ रुपये से घटकर 2024 में 310 करोड़ रुपये पर सिमट गई। दूसरी ओर, राज्य का बकाया 2022 के 43 करोड़ रुपये से उछलकर 2024 में 331 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो लगभग 7.7 गुना बढ़ोतरी है। राहत की बात यह है कि बड़े राज्यों में बिहार का बकाया और वसूली अनुपात 1.07 गुना रहा, जो तुलनात्मक रूप से बेहतर रिकवरी को दर्शाता है।

दिल्ली, तमिलनाडु और अन्य राज्यों का हाल, कागजों में सख्ती फिर भी लापरवाही

देश की राजधानी दिल्ली में हर साल 77 से 78 लाख चालान कट रहे हैं। दिल्ली का बकाया 2022 के 1,133 करोड़ रुपये से दोगुना होकर 2024 में 2,247 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि वसूली महज 192 करोड़ रुपये रही। देश के कुल बकाये में यूपी और दिल्ली की हिस्सेदारी ही 51 फीसदी से अधिक है। तमिलनाडु में 1,011 करोड़, केरल में 472 करोड़ और महाराष्ट्र में 353 करोड़ रुपये का बकाया है। हालांकि, महाराष्ट्र ने बकाये से अधिक 398 करोड़ रुपये की वसूली की, जबकि मध्य प्रदेश में 25.5 लाख चालान कटने के बाद भी बकाया केवल 47 करोड़ रुपये रहा।

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 136A के तहत बने नियम 167A के अनुसार 90 दिनों के भीतर चालान का निस्तारण अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर आरसी और लाइसेंस से जुड़े कार्य रोकने का स्पष्ट प्रावधान है, फिर भी नियमों की अनदेखी के चलते बकाये का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है।

 

Check Also

इटावा में शव रखकर सड़क जाम: ग्वालियर के नाले में मिला था युवक का शव, रिश्तेदार पर हत्या का आरोप; पुलिस के आश्वासन पर 2 घंटे बाद खुला रास्ता

इटावा।  उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी एक युवक की मध्य प्रदेश के ग्वालियर में संदिग्ध …