
दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों और हालिया दुष्कर्म के मामलों पर देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की लचर स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए साफ कहा कि ऐसी जघन्य घटनाएं प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद गहरी खामियों को उजागर करती हैं। अदालत ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि घटनाओं के बाद केवल औपचारिकता निभाते हुए संवेदना प्रकट करने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि महिलाओं को सुरक्षित परिवेश देने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे और अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करनी होगी।
सार्वजनिक स्थलों की बदहाली पर शीर्ष अदालत के तल्ख सवाल
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान सार्वजनिक स्थलों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा कागजी दावों से नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और जमीनी मुस्तैदी से संभव है:
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निगरानी और रोशनी का घोर अभाव: पीठ ने सार्वजनिक पार्कों, बस अड्डों और सड़कों पर स्ट्रीट लाइटों के खराब होने, अंधेरे रास्तों और सीसीटीवी कैमरों की गैर-मौजूदगी पर गंभीर आपत्ति जताई।
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असुरक्षित होती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था: बसों और अन्य परिवहन साधनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर अदालत ने चिंता व्यक्त की, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद होते हैं।
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जवाबदेही तय करने का निर्देश: अदालत ने कहा कि अपराध होने के बाद सक्रिय होने के बजाय अपराध को पनपने से पहले ही रोकने के लिए प्रशासनिक तंत्र को जिम्मेदारी लेनी होगी।
निर्भया कांड के 12 साल बाद भी वही ढर्रा, अदालत ने जताई गहरी चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा हालात की तुलना दिसंबर 2012 के बहुचर्चित निर्भया कांड से की। अदालत ने इस बात पर दुख जताया कि 2012 में चलती बस में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के बाद देशभर में जनाक्रोश फूटा था और कानूनों को बेहद सख्त बनाया गया था, इसके बावजूद आज भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा है। घटनाओं की कार्यप्रणाली में उसी दौर जैसी समानताएं नजर आना बेहद चिंताजनक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून कितना भी कड़ा क्यों न हो, जब तक कानून-प्रवर्तन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मुस्तैद नहीं होंगे, तब तक सड़कों पर महिलाओं की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
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