Sunday , 20 September 2026

मायावती ने फिर चौंकाया! आकाश और दीपिका आनंद नहीं, BSP में अब इस भतीजे को बड़ा जिम्मा… 23 सितंबर को बुलाई राष्ट्रीय बैठक

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तराधिकार और पारिवारिक राजनीति को लेकर बड़ा व कड़ा फैसला किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट घोषणा की है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के परिवार से आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी में कोई भी संगठनात्मक या राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। अब परिवार से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक दायित्व देकर आगे बढ़ाया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए मायावती ने परिवारवाद और आंदोलन की शुचिता को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

ससुराल के प्रभाव में आकाश, पार्टी से दोबारा जुड़ना होगा विश्वासघात

मायावती ने आकाश आनंद को लेकर तीखी तल्खी जाहिर की। उन्होंने कहा कि भाई आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर ही उनके बड़े बेटे आकाश को राजनीति में प्रमोट किया गया था। लेकिन विवाह के पश्चात उनके रवैये, कार्यशैली और गतिविधियों में बदलाव आने के कारण उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा।

मायावती ने दो टूक कहा कि आकाश आनंद अब पूरी तरह से अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव और जंजाल में घिर चुके हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल करना बहुजन आंदोलन के साथ बड़ा विश्वासघात होगा। इसी कड़ी में उन्होंने आनंद कुमार की बेटी का जिक्र करते हुए कहा कि शादी के बाद उनके भी इसी रास्ते पर जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए भविष्य के जोखिम को टालते हुए आकाश और उनकी बहन दोनों को पार्टी जिम्मेदारियों से हमेशा के लिए दूर रखने का अटल निर्णय लिया गया है।

अब ईशान आनंद पर दांव, गलती पर बाहर करने की खुली चेतावनी

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि वे लंबे समय से इस दुविधा में थीं कि परिवार से किसे आगे किया जाए। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने ऐसे सदस्य को मौका देने का फैसला किया जो आकाश आनंद के नक्शेकदम पर न चले।

अब आनंद कुमार के परिवार से सिर्फ ईशान आनंद को पार्टी में सक्रिय किया जाएगा। हालांकि, मायावती ने सतर्क लहजे में कहा कि फिलहाल ईशान का ऐसा कोई झुकाव नहीं दिखता, लेकिन भविष्य के बारे में कुछ तय नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि ईशान आनंद ने भी पार्टी विरोधी या अनुशासनहीन आचरण किया, तो उन्हें भी तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। उस स्थिति में आनंद कुमार के पूरे परिवार से किसी को भी पद नहीं मिलेगा और किसी समर्पित, मिशनरी दलित कार्यकर्ता को संगठन का नेतृत्व सौंपा जाएगा।

बाबा साहेब के ऐतिहासिक पत्र और कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला

मायावती ने बताया कि यह कठोर फैसला उन्होंने पार्टी संस्थापक मान्यवर कांशीराम की शिक्षाओं और डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन सिद्धांतों से प्रेरित होकर लिया है। उन्होंने 23 फरवरी 1956 को नई दिल्ली के 26 अलीपुर रोड से बाबा साहेब द्वारा अपने बेटे यशवंत बी. आंबेडकर को लिखे पत्र का उल्लेख किया।

उस पत्र में डॉ. आंबेडकर ने बेटे द्वारा बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस के अकाउंटेंट के काम में हस्तक्षेप पर नाराजगी जताते हुए साफ लिखा था कि प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है, न कि किसी की निजी जागीर। उन्होंने अनियमितता पर बेटे को प्रेस से बाहर निकालने और कानूनी मुकदमा तक चलाने की अंतिम चेतावनी दी थी। मायावती ने कहा कि यदि राजनीति और समाज सेवा में सफल होना है, तो परिजनों के मोह से ऊपर उठना अनिवार्य है।

23 सितंबर को बसपा की अहम ऑल इंडिया बैठक

मायावती ने देश और जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों के साथ-साथ इस संगठनात्मक बदलाव के संदर्भ में 23 सितंबर को बसपा की एक आपातकालीन और बेहद महत्वपूर्ण ‘ऑल इंडिया बैठक’ बुलाई है। इस बैठक में देशभर के प्रमुख पदाधिकारियों को आगामी रणनीतियों और जिम्मेदारियों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

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