Sunday , 20 September 2026

महाराष्ट्र TET पेपर लीक कांड: जूतों के इनसोल में छिपाकर आगरा की प्रेस से निकाला गया था पेपर, ठाणे SIT ने दाखिल की 3,470 पन्नों की चार्जशीट

महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में ठाणे पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट में 3,470 पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। इस चार्जशीट में कुल 18 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें से 16 को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि 2 आरोपी अभी भी फरार हैं। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस संगठित पेपर लीक गिरोह की जड़ें महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस तक फैली हुई थीं।

डिस्पोजल बिन और जूते के इनसोल से लीक हुआ प्रश्नपत्र

पुलिस की तफ्तीश के मुताबिक, महाराष्ट्र टीईटी के गोपनीय प्रश्नपत्र आगरा स्थित ‘महिम पत्रन प्राइवेट लिमिटेड’ प्रिंटिंग प्रेस में छापे जा रहे थे। छपाई के दौरान जिन कागजों में मामूली तकनीकी या प्रिंटिंग खराबी आ जाती थी, उन्हें तत्काल नष्ट करने के बजाय एक डिस्पोजल बिन में रखा जाता था।

आरोप है कि प्रेस में करीब 20 वर्षों से कार्यरत बाबूलाल कुशवाहा और प्रति घंटे के वेतन पर काम करने वाले नरेश कुमार महौर उर्फ निक्की ने इस सुरक्षा खामी का फायदा उठाया। डिस्पोजल एरिया में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। दोनों आरोपियों ने रिजेक्टेड पेपर्स के ढेर से पूरे प्रश्नपत्र छांटे और उन्हें अपने जूतों के इनसोल के नीचे छिपाकर सुरक्षा जांच को चकमा देते हुए प्रेस परिसर से बाहर निकाल लिया।

आगरा से बिहार और महाराष्ट्र तक फैला था नेटवर्क

चार्जशीट के अनुसार, प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाले गए प्रश्नपत्र पूर्व कर्मचारी सोनू दिवाकर और संजय शर्मा के हाथों होते हुए गिरोह के मुख्य सरगना बिजेंद्र गुप्ता तक पहुंचे। पुलिस ने मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता को बिहार से धर दबोचा था। गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से प्रश्नपत्रों के चार मूल सेट (ओरिजिनल सेट्स) बरामद किए गए थे।

जांच में पेपर लीक के इस बड़े रैकेट के बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और हवाला के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन की पूरी डिजिटल ट्रेल उजागर हुई है।

55 गवाह, डिजिटल साक्ष्य और दो प्रमुख फरार आरोपी

एसआईटी ने अदालत में दाखिल चार्जशीट को मजबूत करने के लिए 55 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी, जांच में शामिल पुलिस अधिकारी और साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वित्तीय खातों का पूरा ब्योरा अदालत के समक्ष पेश किया गया है।

मामले में अभी दो मुख्य आरोपी फरार चल रहे हैं, जिनमें दिल्ली का एक नेटवर्क ऑपरेटर और महाराष्ट्र सरकार का कर्मचारी प्रकाश मिसाल शामिल है। पुलिस का आरोप है कि प्रकाश मिसाल राज्य में पेपर के संभावित खरीदार अभ्यर्थियों से सीधे संपर्क में था।

परीक्षा से 48 घंटे पहले पुलिस की छापेमारी से नाकाम हुआ प्लान

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि बिजेंद्र गुप्ता ने मूल सेट अपने पास सुरक्षित रखे थे और उनकी फोटोकॉपी महाराष्ट्र में फैले अपने दलालों के नेटवर्क को भेजी थी। परीक्षा से ठीक दो दिन पहले डीसीपी जोन-2 पवन बंसोड को मिले पुख्ता खुफिया इनपुट के आधार पर कोनगांव पुलिस ने भिवंडी में छापेमारी कर गिरोह के स्थानीय सदस्यों को दबोच लिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से प्रश्नपत्र व्यापक स्तर पर परीक्षार्थियों तक पहुंचने से पहले ही पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हो गया। अब अदालत में चार्जशीट के आधार पर आगे का न्यायिक ट्रायल शुरू होगा।

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