
राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया के बीच बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत दिल्ली के लगभग 32 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि नोटिस पाने वालों की सूची में दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी शामिल हैं। मामले के तूल पकड़ते ही चुनाव आयोग और चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) कार्यालय ने दोनों ही मामलों में विस्तृत स्थिति स्पष्ट की है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को क्यों भेजा गया था नोटिस?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर सफाई देते हुए चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा था। अधिकारी के मुताबिक, फॉर्म में दर्ज सीएम रेखा गुप्ता की उम्र और उनके माता-पिता की दर्ज आयु के बीच तकनीकी व तार्किक अंतर (Logical Discrepancy) पाया गया था। हालांकि, नोटिस के बाद दस्तावेजों के सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सीएम के सभी दस्तावेज ‘वैलिडेट’ हो चुके हैं और उनका नाम मतदाता सूची की अंतिम लिस्ट में पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
केजरीवाल के नाम पर आप का दावा और चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के करीब तीन सप्ताह बाद मुख्य चुनाव अधिकारी ने उन मतदाताओं की सूची साझा की थी जिन्हें एसआईआर के तहत नोटिस भेजे गए थे। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिजनों के नाम भी दर्ज थे। आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची से अरविंद केजरीवाल का नाम “गायब” कर दिया गया है।
इस सियासी आरोप के बाद चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। ईआरओ ने कहा कि केजरीवाल का नाम काटा नहीं गया है, बल्कि उनके विवरण पिछले एसआईआर रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल नहीं खाने के कारण उन्हें नोटिस जारी किया गया था।
‘नो-मैपिंग’ सूची में क्यों आया केजरीवाल परिवार का नाम?
चुनाव आयोग के बयान के अनुसार, अरविंद केजरीवाल और उनके परिजन विधानसभा क्षेत्र संख्या 40 के पंजीकृत मतदाता हैं। ईआरओ कार्यालय ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मतदाताओं को दो प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
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वे मतदाता जिन्होंने गहन संशोधन (Intensive Revision) के दौरान पुरानी मतदाता सूची में अपनी या अपनी संतान की पूर्व प्रविष्टि से खुद को सफलतापूर्वक लिंक या मैप कर लिया है।
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वे मतदाता जिनका विवरण पिछले गहन संशोधन की मतदाता सूची से लिंक या मैप नहीं हो सका।
ईआरओ ने स्पष्ट किया कि अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार द्वारा जमा किए गए एन्यूमरेशन फॉर्म-3 में वह अनिवार्य जानकारी अपूर्ण थी, जिससे उनके रिकॉर्ड का पिछले संशोधन की मतदाता सूची से मिलान किया जा सके। आवश्यक विवरण की अनुपलब्धता के कारण ही उनके नाम ‘नो-मैपिंग’ (No-Mapping) वाली श्रेणी में दर्ज हुए और नियमानुसार स्थिति स्पष्ट करने के लिए नोटिस भेजा गया।
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