Sunday , 20 September 2026

Lucknow-Kanpur Expressway: भारी वाहनों की ‘नो एंट्री’ अभी रहेगी जारी, तोड़ी जा रही क्षतिग्रस्त स्लैब; 41 दिन में NHAI को ₹18 करोड़ का नुकसान

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले भारी वाहन चालकों के लिए इंतजार और लंबा हो गया है। कानपुर से लखनऊ की दिशा में भारी वाहनों के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध फिलहाल आगे भी जारी रहेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्पष्ट किया है कि आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) की तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस लेन पर भारी वाहनों की आवाजाही बहाल करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पूर्व में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि क्षतिग्रस्त हिस्से की आवश्यक मरम्मत पूरी होते ही ‘नो एंट्री’ हटा ली जाएगी, लेकिन सुरक्षा मानकों को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी तरह की जल्दबाजी न करने का फैसला किया है।

41 दिनों से टोल वसूली ठप, पीएनसी से होगी भरपाई

एक्सप्रेसवे पर आवागमन प्रभावित होने के चलते बीते 6 अगस्त से टोल वसूली पूरी तरह स्थगित चल रही है। एनएचएआई के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन 42 लाख रुपये की टोल वसूली होती थी। पिछले 41 दिनों से टोल प्लाजा बंद रहने के कारण प्राधिकरण को अब तक लगभग 18 करोड़ रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो चुका है। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि राजस्व में हुए इस बड़े नुकसान की भरपाई निर्माणदायी कंपनी पीएनसी (PNC Infratech) से की जाएगी।

प्रभावित हिस्से की तोड़ी जा रही स्लैब, नए सिरे से होगी ढलाई

लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड रोड के जिस हिस्से से बीते रविवार देर रात कंक्रीट और भारी मलबा टूटकर नीचे कानपुर रोड पर गिरा था, वहां अब नए सिरे से काम शुरू कर दिया गया है। तकनीकी विशेषज्ञों की सिफारिश के बाद शुक्रवार सुबह से प्रभावित हिस्से की पुरानी और कमजोर स्लैब को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस पूरे हिस्से की पुरानी कंक्रीट हटाकर दोबारा मजबूत ढलाई की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

सड़क पर मलबा रोकने के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा

स्लैब को तोड़ने के दौरान नीचे मुख्य सड़क से गुजरने वाले वाहनों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता त्रिस्तरीय सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। एलिवेटेड रोड की प्रभावित लेन के चारों ओर करीब 15 फीट ऊंची मजबूत टीन की चादरों की बैरिकेडिंग की गई है, जिसके बाहर हाइड्रा मशीन और अन्य निर्माण वाहन तैनात किए गए हैं। नीचे की सड़क पर कंक्रीट का कोई भी टुकड़ा न गिरे, इसके लिए एलिवेटेड हिस्से के नीचे पहले मजबूत लोहे के एंगल लगाए गए, फिर उनके ऊपर टीन की चादरें बिछाई गईं और अंत में चारों तरफ हरे रंग का सुरक्षा जाल (सेफ्टी नेट) बांधा गया है।

 

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