
उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस 100 से अधिक सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी ठोक रही है, वहीं समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने दो-टूक रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सीटों का बंटवारा किसी दल के संख्यात्मक दावों पर नहीं, बल्कि केवल और केवल उम्मीदवार की जमीनी पकड़ और जीत की ठोस संभावनाओं के आधार पर होगा। सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा कांग्रेस को 40 से 50 सीटों से ज्यादा देने के मूड में नहीं है।
चुनाव आयोग की हलचल के साथ दोनों दलों ने झोंकी ताकत राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसे लेकर चुनाव आयोग ने प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इधर सपा और कांग्रेस ने भी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को लामबंद करना शुरू कर दिया है। अगर पिछले चुनावी गणित पर नजर डालें, तो साल 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग राह चुनी थी। उस चुनाव में सपा ने 111 सीटों पर परचम लहराया था, जबकि उसके साथ रहे राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने 8 और सुभासपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी, हालांकि बाद में ये दोनों सहयोगी सपा का साथ छोड़ गए। दूसरी ओर, कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और पार्टी महज दो सीटों पर सिमट कर रह गई थी।
2017 का हवाला दे रही कांग्रेस, सपा ने रखी कड़ी शर्त कांग्रेस के रणनीतिकारों का तर्क है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के दौरान पार्टी ने 100 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारे थे, लिहाजा इस बार भी सम्मानजनक समझौते के तहत उसे 100 से अधिक सीटें मिलनी चाहिए। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक याद दिला रहे हैं कि 2017 में यह गठबंधन भाजपा के विजय रथ को रोकने में नाकाम रहा था। वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने साफ संकेत दिया है कि गठबंधन का मकसद महज सीटें बांटना नहीं, बल्कि सरकार बनाना है। सपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, कांग्रेस को जिन सीटों की मांग करनी है, वहां के संभावित प्रत्याशियों का पूरा बायोडाटा और जीत का समीकरण पेश करना होगा। कमजोर प्रत्याशी उतारकर गठबंधन को जोखिम में नहीं डाला जाएगा और यदि कांग्रेस अपनी जिद पर अड़ी रही, तो सपा अपने स्तर पर स्वतंत्र फैसला लेने में संकोच नहीं करेगी।
राजभर और निषाद के लिए सपा के दरवाजे पूरी तरह बंद दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर (सुभासपा) और डॉ. संजय निषाद (निषाद पार्टी) के एनडीए से पाला बदलने की लगने वाली अटकलों पर सपा ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सपा के एक प्रमुख रणनीतिकार ने साफ किया है कि पार्टी नेतृत्व ने सभी पदाधिकारियों और विधायकों-सांसदों को सख्त चेतावनी जारी की है। यदि कोई भी नेता सुभासपा या निषाद पार्टी को दोबारा गठबंधन में लाने या उनके साथ तालमेल बिठाने का प्रस्ताव लेकर आएगा, तो उसके खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त अनुशासनात्मक और संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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