Thursday , 17 September 2026

यूपी 2027 की सियासी बिसात: 2024 के नतीजों ने उलझाया बहुमत का गणित, कांग्रेस में ‘ए, बी, सी’ ग्रेडिंग से नपेंगे जिलाध्यक्ष; राहुल-प्रियंका का नया प्लान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। एनडीए 2024 के लोकसभा चुनाव में बने उस जनमानस को पूरी तरह बदलने की कवायद में जुटा है जिसने उसे राज्य में तगड़ा झटका दिया था। वहीं दूसरी तरफ, आम चुनाव के नतीजों से उत्साहित विपक्षी गठबंधन की नजरें उस रफ्तार को कायम रखकर सत्ता की दहलीज पार करने पर टिकी हैं। दोनों ही खेमे अपनी-अपनी सियासी केमिस्ट्री को मजबूत करने में पसीना बहा रहे हैं। हालांकि, 2024 के लोकसभा नतीजों के आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत की राह किसी भी गठबंधन के लिए आसान नहीं है।

विधानसभा वार आंकड़ों में किसी को पूर्ण बहुमत नहीं

2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों को अगर 403 विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से विश्लेषित किया जाए, तो उस समय सपा 184 सीटों पर आगे रही, कांग्रेस 39 पर और एनडीए गठबंधन 174 सीटों पर बढ़त बनाए हुए था। इन आंकड़ों के मुताबिक किसी भी खेमे को अकेले या तय गणित में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ था। ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह लोकसभा चुनाव के नुकसान की भरपाई करते हुए 2017 या 2022 जैसा चुनावी प्रदर्शन दोबारा दोहराए, जबकि इंडिया गठबंधन के सामने अपनी बढ़त को ठोस चुनावी जीत में तब्दील करने का दारोमदार है।

वोट प्रतिशत और सीटों का जटिल गणित

सीटों के लिहाज से भले ही सपा-कांग्रेस गठबंधन 43 लोकसभा सीटें जीतकर अव्वल रहा, लेकिन कुल वोट प्रतिशत के मामले में भाजपा गठबंधन उससे आगे बना रहा। भले ही यह अंतर बेहद मामूली था, लेकिन यह सीटों के हार-जीत के समीकरण में निर्णायक साबित होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल वोट प्रतिशत हासिल करना काफी नहीं होता; यदि किसी पार्टी का जनसमर्थन राज्य के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावी और मुखर हो, तभी सरकार बनने की संभावना प्रबल होती है।

यूपी में लोकसभा से विधानसभा तक पलटने का रहा है इतिहास

उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का मूड हमेशा अप्रत्याशित रहा है। 2004 के आम चुनाव में सपा ने 35 सीटें (26.74% वोट) जीती थीं और बसपा को 9 सीटें (12.04% वोट) मिली थीं, लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने पासा पलटते हुए बसपा को पूर्ण बहुमत सौंप दिया। 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा 23 सीटें और बसपा 27.42% वोट लेकर आगे रही, मगर 2012 के विधानसभा चुनाव में जनता ने सपा को पूर्ण बहुमत देकर सत्ता पर बिठाया। 2014 में भाजपा ने 71 सीटों और 42.13% वोट के साथ प्रचंड लहर बनाई, जो 2017 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत में तब्दील हुई और यह सिलसिला 2019 तथा 2022 तक जारी रहा। वहीं 2012 में प्रचंड बहुमत पाने वाली सपा को 2014 के आम चुनाव में महज 5 सीटों पर समेट कर वोटरों ने बड़े बदलाव का स्पष्ट संकेत दिया था।

कांग्रेस का सख्त ग्रेडिंग मॉडल, आलाकमान हर महीने करेगा समीक्षा

इधर, चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस हाईकमान ने उत्तर प्रदेश में संगठन को जमीन पर सक्रिय करने के लिए सख्त ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया है। संगठन के कामकाज की हर महीने केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सीधी समीक्षा की जाएगी। इसके तहत प्रतिभा खोज अभियान से उभरे योग्य नेताओं की एक अलग सूची तैयार की गई है, जो निष्क्रिय पदाधिकारियों की जगह लेंगे। संगठन को धार देने के लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खुद सचिवों का साक्षात्कार ले रहे हैं, जिसके तहत अब तक 39 सचिवों के इंटरव्यू पूरे किए जा चुके हैं।

ए, बी और सी ग्रेड में बंटेंगे पदाधिकारी, निष्क्रिय चेहरों की होगी छुट्टी

संगठन सृजन अभियान के अंतिम चरण में जिला, मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों को उनके जमीनी कामकाज के आधार पर ए, बी और सी वर्ग में वर्गीकृत किया जाएगा। इसमें ‘सी’ श्रेणी में आने वाले यानी निष्क्रिय पदाधिकारियों को सीधे नोटिस थमाकर पद से हटाया जाएगा। इसी फॉर्मूले पर बहुत जल्द यूपी में कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी होने वाली है। पार्टी ने जमीन पर दूसरी पंक्ति के नेताओं की नई टीम तैयार कर ली है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के हर स्तर पर ऊर्जावान और जवाबदेह नेतृत्व को कमान सौंपी जा सके।

 

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