
वैश्विक मंच पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सबसे बड़े संगठन ‘ब्रिक्स’ ने अपने 45 पृष्ठों के साझा घोषणापत्र के जरिए विश्व की आर्थिक और भू-राजनीतिक दिशा तय करने वाला संदेश जारी किया है। इस घोषणापत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, अंधाधुंध लगाए जा रहे एकतरफा टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों पर तीखी आपत्ति दर्ज की गई है। सदस्य देशों ने साफ कहा कि इस तरह के एकतरफा उपाय अंतरराष्ट्रीय व्यापार तंत्र को पंगु बना रहे हैं। इसके साथ ही घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की भर्त्सना, पश्चिम एशिया में तनाव और गाजा में तुरंत युद्धविराम की वकालत करते हुए वैश्विक मंचों पर ‘ग्लोबल साउथ’ के अधिकारों की जोरदार पैरवी की गई।
टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों पर सख्त रुख
दस्तावेज के पैरा 22 में एकतरफा आर्थिक पाबंदियों और दंडात्मक दबाव की राजनीति को स्पष्ट रूप से खारिज किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा नाम लिए बिना घोषणापत्र ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन द्वारा लागू किए जा रहे मनमाने टैरिफ और सेकेंडरी प्रतिबंध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को तहस-नहस कर रहे हैं। ब्रिक्स देशों ने इसे विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बुनियादी नियमों का खुला उल्लंघन करार दिया। समूह का मानना है कि संरक्षणवादी कदमों से व्यापारिक साझेदारों के बीच अविश्वास गहराता है और अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर पड़ते हैं।
साझा संकट ने घटाई भारत और चीन की दूरियां
अमेरिका की सख्त संरक्षणवादी नीतियों का असर यह हुआ है कि भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने आर्थिक रास्तों को सुरक्षित करने में जुट गई हैं। व्यापारिक हितों पर आए संकट के चलते भारत और चीन जैसे पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भी साझा मंच पर एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। जानकारों के अनुसार, यह घटनाक्रम तेजी से उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का सीधा संकेत है, जहां विकासशील देश किसी एक महाशक्ति के आर्थिक दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं।
पहलगाम आतंकी हमला और पश्चिम एशिया पर कूटनीतिक जोर
घोषणापत्र में सुरक्षा से जुड़े गंभीर मसलों पर व्यापक चर्चा दर्ज की गई है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद पर चिंता जताई गई। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक संवाद को सबसे अहम साधन बताया गया। ब्रिक्स ने गाजा पट्टी में फौरन युद्धविराम लागू करने और वहां बिना किसी बाधा के मानवीय राहत सामग्री पहुंचाने की जोरदार वकालत की, जबकि इस पूरे दस्तावेज में रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई विशेष संदर्भ शामिल नहीं किया गया।
यूएनएससी सुधारों पर पीएम मोदी का कड़ा आह्वान
ब्रिक्स केवल आर्थिक चिंताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), आईएमएफ और विश्व व्यापार संगठन जैसी संस्थाओं में व्यापक सुधार की मांग उठाई गई। शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया जब भी संकट से घिरती है, उसका सबसे पहला और बड़ा प्रभाव विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) पर पड़ता है, लेकिन जब फैसले लेने की बारी आती है तो उन्हें निर्णय तालिका से दूर रखा जाता है। पीएम मोदी ने मांग की कि इस पुरानी व्यवस्था को बदलना होगा और भारत जैसी प्रमुख शक्तियों को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी ही चाहिए, क्योंकि जब भविष्य साझा है तो नीतियां तय करने का अधिकार भी सबको मिलना चाहिए।
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