
नई दिल्ली। गणेश उत्सव के दौरान घर-घर में गणपति बप्पा की भक्ति और उत्साह का माहौल रहता है। 14 सितंबर 2026 से शुरू हुआ यह पावन पर्व 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ संपन्न होगा। गणपति विसर्जन केवल मूर्ति जल में प्रवाहित करना नहीं, बल्कि बप्पा को सम्मान और कृतज्ञता के साथ विदा करने का भावुक अवसर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विसर्जन के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है।
विसर्जन से पहले जरूर करें ‘उत्तर पूजा’
विदाई से पहले बप्पा की उत्तर पूजा करने की परंपरा है।
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विधि-विधान से पूजन: भगवान गणेश को दूर्वा, फूल और मोदक का भोग लगाकर अंतिम आरती करें।
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स्थान परिवर्तन: पूजा संपन्न होने के बाद मूर्ति को उसके मूल स्थान से थोड़ा सा आगे खिसकाएं, जो इस बात का प्रतीक है कि प्रतिमा अब विसर्जन के लिए तैयार है।
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क्षमा प्रार्थना: जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए बप्पा से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करें।
जयकारों के साथ दें भावुक विदाई
घर या पंडाल से प्रतिमा ले जाते समय पूर्ण सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए:
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मंत्र और जयकारे: ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के साथ बप्पा को विदा करें।
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पारिवारिक सहभागिता: परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती और पूजा में शामिल हों, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहे।
पर्यावरण और सुरक्षा का रखें विशेष ध्यान
विसर्जन के समय किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या लापरवाही से बचना चाहिए:
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सुरक्षित विसर्जन: प्रतिमा को सम्मानपूर्वक निर्धारित विसर्जन स्थल या कृत्रिम तालाबों में ही प्रवाहित करें।
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पर्यावरण संरक्षण: जल स्रोतों को नुकसान से बचाने के लिए ईको-फ्रेंडली विसर्जन अपनाएं और धार्मिक भावनाओं तथा स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।
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