Wednesday , 16 September 2026

मेरठ के सेंट्रल मार्केट में गरजा बुलडोजर: 44 सील भवनों पर महा-कार्रवाई शुरू, छावनी में तब्दील हुआ इलाका

मेरठ। शहर के सबसे व्यस्त और पॉश इलाके शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार की सुबह भारी तनाव और अफरा-तफरी के बीच शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत के बाद आवास एवं विकास परिषद ने 44 सील भवनों पर ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इलाके में भारी पुलिस फोर्स के साथ कई बुलडोजर तैनात कर दिए गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में खलबली मची हुई है। 21 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले पर अहम सुनवाई होनी है, जिससे पहले प्रशासन को इन सभी परिसरों को उनके मूल (आवासीय) स्वरूप में लाने की रिपोर्ट दाखिल करनी है।

दुकानदारों में मची चीख-पुकार, खाली करने लगे दुकानें कार्रवाई की भनक लगते ही सुबह से ही सैकड़ों व्यापारी और स्थानीय लोग सड़कों पर जुट गए। आंखों के सामने अपनी रोजी-रोटी उजड़ती देख कई दुकानदार आनन-फानन में शटर खोलकर अपनी दुकानों से कपड़े, गहने और अन्य कीमती सामान बाहर निकालते नजर आए। हर तरफ डर और मायूसी का माहौल दिखा।

आवासीय जमीन पर चल रहे थे शोरूम, अस्पताल और स्कूल गौरतलब है कि आवास एवं विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद आवासीय भूखंडों पर अवैध रूप से संचालित व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, निजी अस्पताल, स्कूल, ज्वैलरी शोरूम, मिठाई की बड़ी दुकानों, डेयरी और सैलून को पूर्व में सील कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई को इन सभी 44 अवैध व्यावसायिक संपत्तियों को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद परिषद ने सर्वे पूरा कर भवन स्वामियों को 15 दिन के भीतर खुद अवैध निर्माण हटाने का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी समयसीमा काफी पहले ही बीत चुकी थी।

बैरिकेडिंग से थम गई रफ्तार, स्कूल नहीं जा सके बच्चे प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पूरे शास्त्री नगर और सेंट्रल मार्केट क्षेत्र को छावनी बना दिया। सभी प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग लगाकर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई। इस सख्त नाकेबंदी का सीधा असर आम जनता पर पड़ा और सुबह स्कूल के लिए निकले छोटे-छोटे बच्चों को भी पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया, जिससे वे स्कूल नहीं पहुंच सके।

मीडिया कवरेज पर पहरा, वीडियोग्राफी पर भी रोक ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का सख्त पहरा देखने को मिला। मीडिया कर्मियों को भी घटना स्थल पर जाने से रोक दिया गया और किसी भी तरह की वीडियोग्राफी या कैमरा चलाने की अनुमति नहीं दी गई। उच्चाधिकारियों के निर्देशों का हवाला देकर कवरेज पर पाबंदी लगाई गई।

पहले चरण में 6 भवनों पर चला हथौड़ा 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में आवास विकास को अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी। इसी कड़ी में बुधवार को चिन्हित 44 भवनों में से 6 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई, जबकि बाकी इमारतों पर भी आने वाले दिनों में कार्रवाई जारी रहेगी।

 

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