
नई दिल्ली। रोजमर्रा की आवश्यक खाद्य वस्तुओं के बाद अब प्रोटीन और डेयरी उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का गणित बिगाड़ दिया है। पिछले एक साल के दौरान पोल्ट्री और डेयरी सेगमेंट में 30 से 40 फीसदी तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है। रोजाना इस्तेमाल होने वाले अंडा, चिकन और दूध के दामों में आई इस अप्रत्याशित तेजी के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक घरेलू बजट पूरी तरह डगमगा गया है।
अंडे के दाम में 38% से ज्यादा का उछाल, 12 रुपये तक पहुंचा एक अंडा आम परिवारों के लिए प्रोटीन का सबसे किफायती और सुलभ स्रोत माना जाने वाला अंडा अब धीरे-धीरे थाली से दूर होता दिख रहा है। बीते एक साल में विभिन्न शहरों के खुदरा बाजारों में अंडे की कीमतों में 35 से 38.7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक मंडियों में नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के ताजा भाव के मुताबिक, 100 अंडों की क्रेट कई प्रमुख केंद्रों पर 670 रुपये से 730 रुपये के पार बिक रही है। थोक दरों में इस तेजी का सीधा असर खुदरा दुकानों पर पड़ा है। पूर्व में 6 रुपये में मिलने वाला सामान्य अंडा अब खुदरा काउंटरों पर 8.50 से 9 रुपये का मिल रहा है, जबकि कई स्थानीय और प्रीमियम बाजारों में ग्राहकों को प्रति अंडा 10 से 12 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
चिकन पहुंचा ₹330 प्रति किलो, नॉन-वेज प्रेमियों की जेब पर डाका अंडे के साथ-साथ ब्रॉयलर चिकन की कीमतों ने भी नॉन-वेज खाने वाले परिवारों की जेब पर भारी दबाव बना दिया है। पिछले एक साल में खुदरा बाजारों में चिकन की कीमतों में 30 से 40 फीसदी की सीधी बढ़ोतरी देखी गई है। जो चिकन पहले औसतन 220 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर उपलब्ध था, वह अब कई प्रमुख खुदरा बाजारों में बढ़कर 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इससे परिवारों के साप्ताहिक खाद्य व्यय में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
दूध के दाम भी बढ़े, प्रीमियम वेरिएंट ₹70 प्रति लीटर के करीब डेयरी उत्पादों की महंगाई ने चाय से लेकर बच्चों के पोषण तक हर पहलू को प्रभावित किया है। अमूल (Amul) और मदर डेयरी (Mother Dairy) जैसी प्रमुख कंपनियों ने उत्पादन और खरीद लागत में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए दूध की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी के बाद देश के कई महानगरों में प्रीमियम फुल क्रीम दूध की दरें 68 से 70 रुपये प्रति लीटर के स्तर तक पहुंच गई हैं।
आखिर क्यों आसमान छू रहे हैं पोल्ट्री और डेयरी उत्पाद? विशेषज्ञों के अनुसार, पोल्ट्री और डेयरी सेक्टर में मूल्य वृद्धि के पीछे पशु आहार (कैटल और पोल्ट्री फीड), सोयामील, मक्का, पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की बढ़ती ढुलाई लागत प्रमुख कारण हैं। फार्म स्तर पर उत्पादन और आपूर्ति की इनपुट कॉस्ट में इजाफा होने से थोक व्यापारियों और अंततः खुदरा ग्राहकों पर यह वित्तीय भार स्थानांतरित हो रहा है। बढ़ती कीमतों के बीच परिवारों के लिए महीने का राशन और पोषण संतुलन साधना एक कठिन चुनौती बन गया है।
voice of india