
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। यहां छात्रों और कामकाजी युवाओं के लिए संचालित की जा रही एक पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भीषण मलबे में दबने से 7 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद राजधानी में बेतरतीब अवैध निर्माण, जर्जर इमारतों की सुरक्षा और नगर निगम (MCD) के मानसून-पूर्व सर्वेक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
27 लाख से अधिक इमारतों की जांच, खतरनाक सिर्फ 19? सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा हर साल मानसून से पहले किए जाने वाले सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में निगम ने शहर भर में 27,84,286 संपत्तियों का सर्वेक्षण किया था, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी विशाल संख्या में से केवल 19 इमारतों को ही ‘खतरनाक’ घोषित किया गया। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि इन सर्वेक्षणों में केवल बाहरी संरचना, दीवारों की दरारें या झुकाव जैसे प्रत्यक्ष संकेत ही देखे जाते हैं; किसी भी इमारत का गहन संरचनात्मक परीक्षण (Structural Audit) नहीं किया जाता।

जून से सितंबर तक 980 संपत्तियों पर चला बुलडोजर, टैक्स भरने से वैधता नहीं
अधिकारियों के अनुसार, नगर निगम ने जून से सितंबर के दौरान अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाकर करीब 980 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की और 460 संपत्तियों को सील किया। इसके अलावा 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस, 708 सीलिंग नोटिस और 720 ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए थे। सत्य निकेतन की ढही इमारत के रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि मालिक ने पिछले साल प्रॉपर्टी टैक्स और 2007 में कन्वर्जन चार्ज जमा किया था। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टैक्स या शुल्क जमा करने से किसी भी निर्माण को स्वतः कानूनी वैधता या सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता।
55 गज के प्लॉट पर खड़ी थी 5 मंजिला इमारत, कोई स्वीकृत नक्शा नहीं
निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, यह इमारत 1990 के दशक में एक पुनर्वास कॉलोनी में मात्र 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनाई गई थी, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह 1970 के दशक की लगभग 50 साल पुरानी संरचना थी। नियमों के अनुसार इन कॉलोनियों में सिर्फ ग्राउंड फ्लोर और एक मंजिल के निर्माण की अनुमति थी, लेकिन तमाम नियमों को ताक पर रखकर इस 5 मंजिला इमारत को लड़कों के पीजी में तब्दील कर दिया गया था। निगम के पास इस इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा मौजूद नहीं था, हालांकि इसके खिलाफ पहले कोई आधिकारिक शिकायत भी दर्ज नहीं थी।
बेसमेंट में मरम्मत और जलजमाव बना हादसे की वजह? मजिस्ट्रेट जांच शुरू
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य और बारिश का पानी जमा होने के कारण नींव कमजोर हो गई, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ। एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने बताया कि हादसे की वास्तविक वजहों का पता लगाने के लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। एहतियात के तौर पर निगम ने पास में चल रहे गर्ल्स पीजी को खाली कराकर सील कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 349 के तहत आसपास की चार अन्य खतरनाक इमारतों को तत्काल खाली करने का नोटिस थमाया गया है।
दक्षिण दिल्ली में लगातार हो रहे हादसे, 4 इंजीनियर और डीसी पर गिरी गाज
राजधानी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते हाल के महीनों में कई बड़े हादसे हुए हैं। इससे पहले 30 मई को सैदुल अजायब में इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 3 जून को हौज रानी के गेस्ट हाउस में भीषण आग से 11 विदेशी नागरिकों सहित 23 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके अलावा मलका गंज और करावल नगर में भी इमारतें गिर चुकी हैं। सत्य निकेतन की घटना के बाद निगम ने सख्त कदम उठाते हुए दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त (DC) राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता विजय गोयल ने पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक में छह-छह मंजिलों के अवैध निर्माणों पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
voice of india