
नोएडा। हाईटेक और औद्योगिक शहर नोएडा में बढ़ता मानसिक तनाव और अवसाद जानलेवा रूप अख्तियार करता जा रहा है। शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों के भीतर 6 महिलाओं समेत कुल 9 लोगों ने मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह, प्रेम प्रसंग और करियर के दबाव के चलते अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने सभी मामलों में शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
यूनिवर्सिटी कैंपस से लेकर हॉस्टल तक में उठाए आत्मघाती कदम
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मीडिया प्रभारी उमेश नैथानी के अनुसार, बीते दिनों में दर्ज प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
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सेक्टर 126: सेक्टर 125 स्थित यूनिवर्सिटी के लाउंड्री रूम में काम करने वाले दिल्ली निवासी राजकुमार (46) ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।
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नॉलेज पार्क: शारदा यूनिवर्सिटी से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही छात्रा निशिका (23) ने हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटककर जान दे दी। जांच में सामने आया है कि शादी को लेकर परिजनों से चल रही असहमति के कारण वह गहरे तनाव में थी।
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ईकोटेक-3: कुलेसरा हिंडन बैराज में 19 वर्षीय संजना ने छलांग लगा दी। प्राथमिक जानकारी के अनुसार प्रेमी के परिजनों द्वारा दहेज मांगने और शादी से मुकरने के कारण उसने यह कदम उठाया। पुलिस और NDRF की टीम बैराज में युवती के शव की तलाश कर रही है।
घरेलू कलह और तनाव के चलते अलग-अलग इलाकों में हुईं घटनाएं
शहर के अन्य क्षेत्रों से भी खुदकुशी के कई मामले सामने आए हैं:
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फेज-3: गढ़ी चौखंडी में अंकिता (19) और क्षेत्र की ही रहने वाली ज्योति पांडा (30) ने अपने-अपने घरों में फंदा लगाकर जान दी। ज्योति की शादी 2 वर्ष पूर्व हुई थी।
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सेक्टर 63: बहलोलपुर गांव की रहने वाली तनु (19) ने कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या की।
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दादरी व सेक्टर 113: दादरी में विनय (29) और सेक्टर 113 क्षेत्र में रोहित (31) ने मानसिक अवसाद के चलते फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
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दनकौर: मानसिक तनाव से जूझ रही खुशबू (35) ने घर पर जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
एकाकीपन, सोशल मीडिया और सहनशक्ति की कमी जिम्मेदार: मनोचिकित्सक
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एन. के. शर्मा के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली की अंधी दौड़, बेरोजगारी, पढ़ाई का दबाव, प्रेम में असफलता और रिश्तों का टूटना लोगों को गहरे अवसाद की ओर धकेल रहा है। सोशल मीडिया और आभासी दुनिया ने लोगों को अपनों से दूर कर दिया है, जिससे लोग अपनी भावनाएं खुलकर साझा नहीं कर पाते। युवाओं में सहनशक्ति की कमी और संवादहीनता के चलते वे छोटी-छोटी बातों पर आवेश में आकर ऐसे आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।
(यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन ‘टेली-मानस’ 14416 या 1800-891-4416 पर संपर्क कर विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।)
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