लखनऊ। रफ्तार और सुगम सफर का सपना दिखाकर करीब 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 20 दिनों के भीतर ही बदहाली के आंसू रो रहा है। जिस ड्रीम प्रोजेक्ट को यूपी के विकास का मॉडल बताया जा रहा था, उसकी गुणवत्ता की कलई पहली ही बारिश ने खोलकर रख दी है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क धंसने, दरारें आने और स्लोप की मिट्टी खिसकने की तीन दर्जन से अधिक गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।
ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल, बारिश के पानी ने खोली घटिया निर्माण की पोल
ग्राउंड पड़ताल में इस भीषण नुकसान की सबसे बड़ी तकनीकी वजह जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था की भारी लापरवाही सामने आई है। बारिश का पानी एक्सप्रेसवे से बाहर निकालने के लिए नालियां तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन सड़क की ढलान का नालियों से सही कनेक्शन करना ही इंजीनियर भूल गए। नतीजा यह हुआ कि मूसलाधार बारिश का पानी एक्सप्रेसवे पर ही जमा रहा। लगातार पानी भरे रहने के कारण सड़क की ऊपरी परत और उसके नीचे की नींव की मिट्टी ढीली पड़ गई, जिससे तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर सड़क धंस गई और बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे बन गए।
7 मिनट में भी नहीं निकला 500 लीटर पानी: NHAI की जांच में चौंकाने वाली रिपोर्ट
एनएचएआई (NHAI) की शुरुआती तकनीकी जांच में ड्रेनेज सिस्टम की घटिया कारगुजारी की पुष्टि हो चुकी है। जांच टीम ने जब टेस्टिंग के लिए सड़क पर 500 लीटर पानी डाला, तो 7 मिनट बीत जाने के बाद भी वह नालियों के जरिए बाहर नहीं निकल सका। इस खुलासे के बाद निर्माण एजेंसी पीएनसी (PNC) इंफ्राटेक के काम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद बनी बनाई नालियों को हथौड़ों से तोड़-तोड़कर सड़क से जोड़ने का पैचवर्क वाला काम शुरू किया गया है।
तीन दर्जन से अधिक जगहों पर दरारें, पुलों में सीमेंट भरकर लीपापोती
सफर कर रहे राहगीरों की जान इस समय जोखिम में है। कानपुर से लखनऊ की तरफ किलोमीटर संख्या 32.4 के पास सड़क धंसने की वजह से पूरा ट्रैफिक सिर्फ एक लेन से निकाला जा रहा है, जिससे लंबा जाम लग रहा है। वहीं किलोमीटर संख्या 60 के पास बने अंडरपास के स्लोप की मिट्टी पूरी तरह खिसक चुकी है। स्लोप को सीमेंट से पक्का न करने के कारण एक्सप्रेसवे की मुख्य नींव पर संकट मंडरा रहा है। इतना ही नहीं, कई पुलों (फ्लाईओवर) में उभरी गहरी दरारों को सीमेंट भरकर छिपाने की कोशिश की जा रही है। किनारों पर गिट्टी के लिए छोड़े गए हिस्सों में उग आई ऊंची-ऊंची घास रात के समय भीषण हादसों को न्योता दे रही है।
जनता के 4200 करोड़ का नुकसान, युद्धस्तर पर मरम्मत का नाटक
जनता की गाढ़ी कमाई के 4,200 करोड़ रुपये पानी में बहने के बाद अब NHAI के जिम्मेदार अधिकारियों और पीएनसी इंफ्राटेक पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। फिलहाल कई जगहों पर लाल बैरिकेडिंग लगाकर युद्धस्तर पर मरम्मत का काम चलाया जा रहा है। हालांकि, अचानक सामने आ रहे गड्ढों और मरम्मत के चलते चालकों को भारी जाम और हादसों के साये में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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