Monday , 17 August 2026

एनकाउंटर में ढेर हुआ पलामू का खूंखार गैंगस्टर सुजीत सिन्हा: जामताड़ा हाईवे पर कैदी गाड़ी हुई पंचर, हथियार छीनकर भागने की कोशिश में पुलिस ने मारी गोली

नई दिल्ली/रांची। झारखंड के अपराध जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पलामू का रहने वाला और सूबे के सबसे खूंखार अपराधियों में शुमार गैंगस्टर सुजीत सिन्हा रविवार देर रात जामताड़ा में एक पुलिस एनकाउंटर में ढेर हो गया। धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान सुपायडीह हाईवे पर हुई इस मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा मौके पर ही मारा गया। उस पर रंगदारी, हत्या, आगजनी और रंगदारी नेटवर्क चलाने समेत 75 से ज्यादा संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे।

हाईवे पर पंचर हुई कैदी गाड़ी और पलट गया पूरा खेल

मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा कारणों के चलते सुजीत सिन्हा को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था। रविवार देर रात जैसे ही पुलिस का कैदी वाहन जामताड़ा जिले के सदर थाना अंतर्गत सुपायडीह हाईवे पर पहुंचा, गाड़ी का टायर अचानक पंचर हो गया।

कड़ी सुरक्षा के बीच जवानों ने गाड़ी रोककर सुजीत सिन्हा को दूसरे वाहन में शिफ्ट करना शुरू किया। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर सुजीत सिन्हा ने एक पुलिसकर्मी का हथियार झपट लिया और भागने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि उसने भागते हुए जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस टीम ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई में सुजीत सिन्हा वहीं ढेर हो गया।

जेल में रहकर चलाता था रंगदारी का सिंडिकेट

सुजीत सिन्हा का खौफ झारखंड के आधा दर्जन से अधिक जिलों में इस कदर था कि व्यापारी वर्ग के बीच उसका नाम सुनते ही हड़कंप मच जाता था। हत्या और टेंडर विवादों के जरिए अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला यह गैंगस्टर जेल की सलाखों के पीछे रहकर भी अपने गुर्गों के जरिए रंगदारी और वसूली का सिंडिकेट चला रहा था।

2007 के ‘डबल मर्डर’ से आया था सुर्खियों में सुजीत सिन्हा पहली बार 2007 में पलामू के टाउन थाना क्षेत्र में हुए चर्चित भूषण सिंह और अनिल सिंह डबल मर्डर केस के बाद अपराध जगत की सुर्खियों में आया था। टेंडर विवाद में अंजाम दिए गए इस हत्याकांड का वह मुख्य मास्टरमाइंड था। इस मामले समेत अन्य केसों में सुनवाई के बाद साल 2019 में पलामू कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

टेरर फंडिंग से लेकर पाकिस्तान-यूएई तक जुड़े थे तार

जांच एजेंसियों के खुलासे के मुताबिक, सुजीत सिन्हा गिरोह का नेटवर्क सिर्फ पलामू या धनबाद तक सीमित नहीं था। उसके संबंध कुख्यात अमन साहू गिरोह और प्रिंस खान गैंग से भी जुड़े हुए थे।

जांच में दावा किया गया है कि कारोबारियों से वसूली गई रंगदारी की रकम को प्रिंस खान के जरिए यूएई (UAE) के रास्ते पाकिस्तान तक भेजा जाता था। इसी काली कमाई का इस्तेमाल अवैध हथियार खरीदने के लिए किया जाता था, जिन्हें ड्रोन के जरिए पंजाब सीमा से भारत लाया जाता था। इन हथियारों की आपूर्ति झारखंड और आसपास के राज्यों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए होती थी।

पत्नी भी जेल में बंद, गैंग पर पैनी नजर

सुरक्षा कारणों से सुजीत सिन्हा को अब तक एक दर्जन से भी ज्यादा बार अलग-अलग जेलों में ट्रांसफर किया जा चुका था, लेकिन उसका नेटवर्क कभी कमजोर नहीं पड़ा। यहां तक कि उसकी पत्नी रिया सिन्हा पर भी गिरोह का संचालन करने का आरोप है और वह फिलहाल चाईबासा जेल में बंद है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुजीत के मारे जाने के बाद भी गिरोह के बाकी सक्रिय गुर्गों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

डेढ़ साल के भीतर दूसरे बड़े गैंगस्टर का अंत

गौरतलब है कि इससे पहले 11 मार्च 2025 को सूबे का एक और बड़ा गैंगस्टर अमन साहू भी पलामू के चैनपुर इलाके में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। उसे रायपुर जेल से रांची लाया जा रहा था। लगभग डेढ़ साल के भीतर झारखंड पुलिस की यह दूसरी सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। फिलहाल नियम के मुताबिक सुजीत सिन्हा एनकाउंटर मामले की भी न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है।

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