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मेरठ में फर्जी पुलिस चौकी का बड़ा खुलासा: पूर्व पत्रकार चला रहा था ‘समानांतर थाना’, CO से लेकर सिपाही तक सब निकले फर्जी…नजारा देख उड़े अफसरों के होश

मेरठ/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक हैरान कर देने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने खाकी महकमे के भी होश उड़ा दिए हैं। यहां पुलिस ने एक ऐसी फर्जी पुलिस चौकी का पर्दाफाश किया है, जो असली थानों की तर्ज पर पूरी तरह समानांतर चलाई जा रही थी। इस नकली चौकी में क्षेत्राधिकारी (CO), दरोगा से लेकर सिपाही तक के पदों पर फर्जी नियुक्तियां की गई थीं। इस पूरे हाईटेक फर्जीवाड़े और समानांतर थाने का मास्टरमाइंड राहुल नाम का शख्स निकला, जो खुद को पूर्व पत्रकार बताता है।

मुखबिर की सूचना पर पड़ा छापा, नजारा देख उड़े अफसरों के होश

माफिया और ठगों के नेटवर्क के खिलाफ चल रही निगरानी के बीच पुलिस को मुखबिर से इस फर्जी चौकी की गुप्त गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने रणनीति बनाकर जब इस तथाकथित चौकी पर अचानक छापा मारा, तो अंदर का नजारा देखकर खुद वरिष्ठ अधिकारी हैरान रह गए।

चौकी के भीतर बिल्कुल असली पुलिस स्टेशन जैसा माहौल और प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया था। आम लोगों को झांसे में लेने के लिए वह हर व्यवस्था मौजूद थी, जो किसी सरकारी पुलिस चौकी में होती है।

CO, दरोगा और सिपाही: फर्जी वर्दी में चल रहा था पदों का खेल

इस रैकेट में सुनियोजित तरीके से पदों का बंटवारा किया गया था। मास्टरमाइंड राहुल खुद को मुख्य संचालक और प्रभावशाली अफसर के रूप में पेश करता था। उसने अपने सिंडिकेट में नीचे तक लोगों को नौकरियां दे रखी थीं—

  • फर्जी नियुक्तियां: बाकायदा सीओ (CO), सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) और सिपाहियों के पद बनाए गए थे।

  • वर्दी और आईडी कार्ड: यहां तैनात फर्जी पुलिसकर्मी असली जैसी वर्दी और पहचान पत्र पहनकर ड्यूटी देते थे, जिससे किसी को रत्ती भर भी शक न हो।

  • अवैध वसूली का नेटवर्क: पीड़ितों की शिकायतें सुनने, मामले निपटाने और डरा-धमकाकर पैसों की वसूली का पूरा खेल यहीं से खेला जा रहा था।

बीट रजिस्टर, फर्जी मुहरें और सरकारी जैसे दस्तावेज बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ जो सबूत लगे हैं, उन्होंने इस फर्जीवाड़े की गहराई को उजागर कर दिया है। मौके से असली थानों की तर्ज पर रखे गए बीट रजिस्टर, कई सरकारी विभागों के फर्जी लेटरपैड, मुहरें और अवैध प्रशासनिक कागजात बरामद किए गए हैं।

जांच अधिकारी का रुख: “पुलिस ने मुख्य आरोपी राहुल और उसके सहयोगियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है कि यह समानांतर थाना कब से चल रहा था, अब तक कितने लोगों को ठगा गया और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं।”

पुलिस की कार्रवाई और जांच के दायरे

पुलिस अब इस बात की तहकीकत में जुटी है कि इस फर्जी नेटवर्क के तार कहां-कहां तक फैले हैं और क्या इसमें किसी वास्तविक पुलिसकर्मी या प्रशासनिक व्यक्ति की सहभागिता थी। फिलहाल मास्टरमाइंड और उसके गुर्गे पुलिस की सलाखों के पीछे हैं और पूरे मेरठ में इस ‘फर्जी थाने’ की चर्चा जोर-शोर से हो रही है।

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