श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने वाली ‘टारगेट किलिंग’ की घटनाओं ने एक बार फिर खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार देर शाम ईंट भट्ठे पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों पर हुए आतंकी हमले में अब दूसरे मजदूर ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। इसके साथ ही इस कायराना हमले में जान गंवाने वाले दोनों मजदूरों की मौत हो चुकी है।
बीते महज 10 दिनों के भीतर घाटी में टारगेट किलिंग की यह दूसरी बड़ी घटना है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी समेत तीन बेगुनाह लोगों की हत्या की जा चुकी है।
दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के निवासी, SKIMS अस्पताल में तोड़ा दम
पुलिस अधिकारियों द्वारा शनिवार को दी गई जानकारी के अनुसार, केल्लम इलाके में हुए इस आतंकी हमले का शिकार बने दोनों मजदूर 20 से 30 वर्ष की उम्र के युवा थे और छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे:
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दीपक रात्रे: हमले के तुरंत बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
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भूपिंदर: गंभीर रूप से घायल भूपिंदर को प्राथमिक उपचार के बाद जीएमसी अनंतनाग से श्रीनगर के SKIMS (सौरा) अस्पताल रेफर किया गया था, जहां शनिवार सुबह इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
10 दिन में 3 हत्याएं: अनंतनाग में पुलिस अधिकारी की हुई थी हत्या
घाटी में आतंकवादियों द्वारा गैर-स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का यह सिलसिला बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गया है। इस घटना से 10 दिन से भी कम समय पहले अनंतनाग शहर में आतंकियों ने एक स्थानीय पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
फिर दोहराया 2024 जैसा खौफनाक मंजर
इससे पहले वर्ष 2024 में भी श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में 7 फरवरी को पंजाब निवासी दो प्रवासी मजदूरों—अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की आतंकियों ने प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारकर हत्या कर दी थी।
अचानक से गैर-कश्मीरियों पर बढ़े इन हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे दक्षिण कश्मीर में चौकसी बढ़ा दी है। कुलगाम और आसपास के इलाकों में सेना, सीआरपीएफ (CRPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस का संयुक्त सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि हमले में शामिल आतंकियों को जल्द से जल्द न्यूट्रलाइज किया जा सके।
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