Wednesday , 9 September 2026

मिडिल ईस्ट की जंग से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट: $120 के पार जा सकता है कच्चा तेल! होर्मुज स्ट्रेट में भारी तबाही से दुनिया में हाहाकार

लंदन/न्यूयॉर्क: मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में भड़की भीषण जंग ने वैश्विक बाजार के होश उड़ा दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी दनादन मिसाइल और ड्रोन हमलों की आग अब सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में लग चुकी है। सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे मिसाइल हमलों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हर रोज तूफानी रफ्तार से भाग रही हैं। सोमवार तक जो ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के आसपास शांति से ट्रेड कर रहा था, वह मंगलवार (14 जुलाई 2026) को अचानक रॉकेट बनकर 84 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा।

तेजी से बदलते इन हालातों ने दुनिया भर में गंभीर आर्थिक मंदी और बेकाबू महंगाई का खतरा पैदा कर दिया है। एक्सपर्ट्स के बीच अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अमेरिका-ईरान का यह नया संघर्ष पहले से ज्यादा लंबा खिंचेगा और क्या इस बार कच्चे तेल की कीमतें तमाम रिकॉर्ड तोड़ते हुए 120 डॉलर प्रति बैरल के भी पार निकल जाएंगी?

बाजार में हाहाकार: ब्रेंट क्रूड $84 के पार, WTI में भी भारी उछाल

होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जारी घमासान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी ट्रेडिंग को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड से लेकर अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) और मर्बन क्रूड के भाव में जोरदार तेजी दर्ज की गई।

  • ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव $84.44 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

  • WTI क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी क्रूड भी तेज छलांग लगाते हुए $80 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर पर पहुंच गया।

  • मर्बन क्रूड (Murban Crude): खाड़ी देशों के इस प्रमुख क्रूड की कीमत भी बढ़कर $79.34 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही थी।

क्यों पूरी दुनिया के लिए ‘लाइफलाइन’ है होर्मुज स्ट्रेट?

अमेरिका और ईरान के इस महायुद्ध में ‘होर्मुज स्ट्रेट’ सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन चुका है। ईरान, ओमान और यूएई के बीच स्थित यह समुद्री रास्ता महज 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की असली चाबी इसी के पास है।

होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत: दुनिया की कुल तेल और गैस की जरूरत का लगभग 20 फीसदी (यानी पांचवां हिस्सा) इसी संकरे समुद्री रूट से होकर गुजरता है। इस रूट में पैदा हुई मामूली सी रुकावट भी भारत, ब्रिटेन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे तेल आयात पर पूरी तरह निर्भर देशों के लिए किसी बड़ी तबाही से कम नहीं होती।

इतिहास गवाह है कि जब पिछले संघर्ष के दौरान यह रूट प्रभावित हुआ था, तब कच्चा तेल $120 प्रति बैरल पर पहुंच गया था। इसके चलते दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं और आम जनता को भारी एलपीजी संकट (LPG Shortage) व रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा था।

क्या $120 के पार जाएगा कच्चा तेल? ट्रंप के सख्त तेवरों ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक बाजार में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा डर है कि क्या यह जंग कच्चे तेल को $120 के पार धकेल देगी। इस डर की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख है। ट्रंप फिलहाल ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते या नरमी के मूड में नहीं दिख रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक तीखे बयान में साफ कहा था कि “ईरान के साथ बातचीत करना सिर्फ समय की बर्बादी है।”

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के अलावा ईरान की तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले ‘खार्ग आइलैंड’ (Kharg Island) को निशाना बनाया, तो दुनिया एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट में फंस जाएगी।

बता दें कि ईरान अपने कुल तेल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा अकेले इसी खार्ग आइलैंड ऑयल टर्मिनल के जरिए दुनिया को भेजता है। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही ईरान की यूरेनियम साइट्स की तरफ आक्रामक इशारा कर चुके हैं। ऐसे में अगर युद्ध और भड़का तथा ईरान के ऑयल टर्मिनलों पर सीधे हमले हुए, तो कच्चे तेल की कीमतें $120 के स्तर को बेहद आसानी से पार कर जाएंगी, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और भयानक महंगाई का दौर शुरू हो सकता है।

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