Saturday , 11 July 2026

अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला मामला सुप्रीम कोर्ट में: CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग वाली याचिकाओं पर इस तारीख को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित अनियमितताओं व गबन का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज तक पहुंच गया है। राम मंदिर दान चोरी और वित्तीय हेरफेर की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर दायर कई रिट याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस अत्यंत संवेदनशील मामले की पहली सुनवाई अब 13 जुलाई को होगी।

सीजेआई की बेंच करेगी मामले की सीधी सुनवाई

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच स्वयं इस मामले की सुनवाई करेगी। इस बेंच में सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल होंगे। यह पीठ इस प्रकरण से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगी, जिसमें ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े किए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांगें: CBI जांच से लेकर फॉरेंसिक ऑडिट तक

सुप्रीम कोर्ट में दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:

  1. CBI जांच: याचिकाकर्ताओं (नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव और राजद सांसद सुधाकर सिंह) ने मांग की है कि इस पूरे गबन मामले की जांच राज्य एजेंसी के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

  2. CAG ऑडिट: याचिका में मांग की गई है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूरे वित्तीय लेनदेन और दान की राशि का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से विशेष ऑडिट कराया जाए।

  3. फॉरेंसिक ऑडिट: राजद सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका में मंदिर ट्रस्ट के डिजिटल और भौतिक वित्तीय रिकॉर्ड का ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ कराने की मांग की गई है, ताकि हेराफेरी के हर सबूत का पता चल सके।

  4. सबूतों की सुरक्षा: जनहित याचिका में अदालत से यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि मामले से जुड़े सभी कागजी दस्तावेज, डिजिटल लेजर, UPI ट्रांजैक्शन लॉग और बैंक स्टेटमेंट को तत्काल सुरक्षित किया जाए ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।

ट्रस्ट के वित्तीय फैसलों पर रोक की मांग

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी गुहार लगाई है कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक राम मंदिर ट्रस्ट को बड़ी धनराशि के निवेश, बड़े कॉन्ट्रैक्ट देने या कोई भी महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय लेने से रोका जाए। इसके लिए एक स्वतंत्र ‘निगरानी समिति’ के गठन की मांग की गई है, जिसकी पूर्व मंजूरी के बिना ट्रस्ट कोई भी बड़ा वित्तीय फैसला न ले सके।

अयोध्या राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में इस दान घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट की होने वाली आगामी सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

 

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