Saturday , 27 June 2026

EV Price Hike Alert: इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने वालों को बड़ा झटका! 25,000 रुपये तक महंगी हो सकती हैं EV कारें, सामने आई ये बड़ी वजह

नई दिल्ली। भारत में पर्यावरण को बचाने और प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में ईवी खरीदने वालों की जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला है। वाहन विनिर्माताओं के प्रमुख संगठन सायम (SIAM) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को एक बड़ी चेतावनी दी है। सायम का कहना है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित नए बैटरी रीसाइक्लिंग नियमों के कारण देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 3 से 5 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। वाहन निर्माताओं का मानना है कि इन सख्त नियमों का सीधा और नकारात्मक असर देश में ईवी की बिक्री की रफ्तार पर पड़ सकता है।

लागत में 25,000 रुपये तक की होगी सीधी बढ़ोतरी, सायम ने पर्यावरण मंत्री से लगाई गुहार

वाहन निर्माताओं के संगठन सायम ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर पिछले साल नवंबर में सीपीसीबी को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। इसके साथ ही हाल ही में देश के पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में भी अपनी गहरी चिंताएं सामने रखी हैं। सायम का साफ कहना है कि सरकार के मौजूदा सख्त नियमों का पालन करने से औसतन 35 से 40 किलोवॉट घंटे (kWh) की क्षमता वाली एक सामान्य इलेक्ट्रिक कार की बैटरी बनाने की लागत में करीब 8,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक की सीधी वृद्धि हो जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बढ़ी हुई कीमत में बैटरी का संग्रह (Collection), भंडारण (Storage) और हैंडलिंग का भारी-भरकम खर्च अभी अलग से शामिल होगा, जो अंततः ग्राहकों की जेब से ही वसूला जाएगा।

8 साल बाद 70% बैटरियां इकट्ठा करने का नियम, वाहन निर्माताओं ने बताया अनुचित बोझ

इस पूरे विवाद और चिंता की मुख्य वजह सरकार के बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम हैं। इन नियमों के तहत अब वाहन विनिर्माताओं (Automobile Manufacturers) के लिए यह अनिवार्य किया जा रहा है कि वे बाजार में बेचे गए वाहनों के 8 साल के उपयोग के बाद कम से कम 70 फीसदी बैटरियों को वापस एकत्र (Collect) करें। सरकार की योजना इस लक्ष्य को आगे चलकर 82 फीसदी तक बढ़ाने की है। सायम ने इस नियम पर अपना मुख्य तर्क देते हुए कहा है कि आजकल गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरियों की उम्र काफी लंबी होती है, जिससे उन्हें इतनी जल्दी वापस पाना व्यावहारिक नहीं है।

धातु रिकवरी लक्ष्यों को आसान बनाने की मांग, बिक्री घटने का मंडराया खतरा

विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) ढांचे के तहत लागू किए जा रहे इन नियमों को लेकर ऑटो इंडस्ट्री में भारी असमंजस का माहौल है। संगठन ने सीपीसीबी से इन कड़े नियमों और रीसाइक्लिंग लक्ष्यों को व्यावहारिक रूप से आसान बनाने की पुरजोर अपील की है। सायम का तर्क है कि सरकार द्वारा तय किए गए मौजूदा धातु-विशिष्ट रिकवरी लक्ष्य (Metal-Specific Recovery Targets) रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया के दौरान होने वाले नुकसान और अलग-अलग बैटरी घटकों के अंतर को सही ढंग से ध्यान में नहीं रखते हैं। ऐसे में इन नियमों को हूबहू लागू करने से वाहन उत्पादकों पर एक अनुचित और भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, जो देश में तेजी से बढ़ रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम की रफ्तार को धीमा कर सकता है।

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