Thursday , 25 June 2026

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने सौंपी 15 पन्नों की रिपोर्ट, चंपत राय पर संदेह और नियुक्तियों में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा, गरमाई राजनीति !

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित संवेदनशील मामले ने अब एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित मोड़ ले लिया है. इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) ने 6 दिनों तक चली बेहद गहन पड़ताल और दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद अपनी 15 पन्नों की शुरुआती जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. हालांकि, संवेदनशीलता को देखते हुए इस रिपोर्ट को अभी पूरी तरह गोपनीय (Confidential) रखा गया है और इसकी कोई भी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से जो चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे आने वाले दिनों में राम मंदिर ट्रस्ट और इससे जुड़े अधिकारियों के बीच बड़ा हड़कंप मचा सकती हैं.

कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति प्रक्रिया और चंपत राय पर गहराया संदेह

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की इस प्राथमिक जांच रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की भूमिका को संदिग्ध माना गया है. रिपोर्ट में सबसे गंभीर खुलासा मंदिर के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर हुआ है. जांच में पाया गया है कि राम मंदिर परिसर में स्टाफ और सेवादारों की भर्ती में भारी अनियमितताएं और गंभीर गड़बड़ियां बरती गईं. परिसर में कई ऐसे कर्मचारी तैनात मिले, जिनकी नियुक्ति का कोई आधिकारिक या लिखित आदेश (Appointment Letter) रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं था. यही नहीं, इन कर्मचारियों को काम पर रखने से पहले उनका कोई पुलिस वेरिफिकेशन या बैकग्राउंड चेक भी नहीं कराया गया था. इसके अलावा, मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती, उसके रख-रखाव और सुरक्षा की निगरानी करने वाली डिजिटल और मैनुअल प्रणाली में भी भारी लापरवाही के पुख्ता संकेत मिले हैं, जिसने पूरे सुरक्षा सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी पर चढ़ावा हुआ कम, सिक्कों का दिया गया अजीब तर्क

एसआईटी की तफ्तीश में यह बात भी प्रमुखता से सामने आई है कि पिछले कुछ समय में मंदिर में आने वाले गुप्त और प्रत्यक्ष चढ़ावे की राशि में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला. जब जांच टीम ने बैंक स्टेटमेंट, कैश बुक और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की दैनिक संख्या के आधिकारिक आंकड़ों का आपस में मिलान किया, तो कई बार ऐसी बड़ी विसंगतियां पाई गईं जहां भक्तों की संख्या में तो भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन बैंक में जमा होने वाली चढ़ावे की रकम उसके अनुपात में बेहद कम दिखाई गई. इस भारी अंतर को लेकर जब एसआईटी ने संबंधित प्रभारियों से पूछताछ की, तो उनकी तरफ से यह अजीब तर्क दिया गया कि उस विशेष अवधि के दौरान भक्तों द्वारा नोटों की बजाय सिक्कों का चढ़ावा ज्यादा चढ़ाया गया था, जिसकी गिनती में समय लगा. हालांकि, यह गोलमोल जवाब जांच एजेंसियों को संतुष्ट नहीं कर पाया है.

5 साल में कुछ कर्मचारियों की संपत्ति हुई रॉकेट, दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड गायब

एसआईटी की गोपनीय रिपोर्ट में मंदिर के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों और सेवादारों की निजी संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई बेतहाशा और रहस्यमयी बढ़ोतरी का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है, जिसने इस कथित वित्तीय हेराफेरी के संदेह को और ज्यादा गहरा कर दिया है. हालांकि, इस पूरी जांच में सबसे बड़ी तकनीकी दिक्कत यह आ रही है कि जांच एजेंसी अब तक यह स्पष्ट और सटीक आंकड़ा तय नहीं कर पाई है कि वास्तव में कुल कितना चढ़ावा मंदिर में आया था और उसमें से कितनी रकम या आभूषण कथित रूप से गायब हुए हैं. इसकी मुख्य वजह यह है कि मंदिर प्रशासन के पास हर श्रद्धालु द्वारा दिए गए दान या चढ़ावे का कोई व्यवस्थित, कंप्यूटराइज्ड या रसीद आधारित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला.

रसीद न मिलने पर फूटा श्रद्धालुओं का गुस्सा, 200 किलो चांदी की ईंटों का विवाद

इधर, चढ़ावे के हिसाब-किताब में पारदर्शिता न होने को लेकर देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं का गुस्सा भी अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है. कई नामचीन दानी और आम भक्त अब खुलकर सामने आ रहे हैं और अपने द्वारा समर्पित किए गए दान का आधिकारिक हिसाब मांग रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. इसी बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) ने ट्रस्ट पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि एक महिला श्रद्धालु से मंदिर में बकायदा चांदी की एक बड़ी प्रतिमा जमा करवाई गई थी, लेकिन उसे आज तक न तो कोई आधिकारिक रसीद दी गई और न ही उस बहुमूल्य प्रतिमा का कोई हिसाब रिकॉर्ड में दर्ज है. इसके साथ ही, मंदिर निर्माण के लिए दान में मिली 200 किलो चांदी की ईंटों के मुख्य लॉकर से अचानक गायब होने का सनसनीखेज मामला पहले ही सुर्खियों में है, जिसने इस पूरे विवाद की आग में घी डालने का काम किया है.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा, विहिप ने की फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग

इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अब उत्तर प्रदेश से लेकर देश की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है और विपक्ष सरकार पर हमलावर है. समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को सोशल मीडिया और बयानों के जरिए उठाकर योगी सरकार को चौतरफा घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इसे सीधे तौर पर करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए आरोप लगाया कि यह सिर्फ एक आर्थिक भ्रष्टाचार या गड़बड़ी नहीं है, बल्कि दुनिया भर के राम भक्तों के अटूट विश्वास और आस्था के साथ किया गया एक अक्षम्य धोखा है. दूसरी तरफ, इस विवाद के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. विहिप ने सरकार से इस पूरे मामले में तुरंत दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने, जांच की गति तेज करने और मामले की रोजाना सुनवाई के लिए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजने की पुरजोर मांग की है.

एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद अब वे जल्द ही जांच का दूसरा और अधिक कड़ा चरण शुरू करने की अनुमति मांग रहे हैं, ताकि सभी डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों को फॉरेंसिक जांच के जरिए खंगालकर दोषियों के खिलाफ कानूनी रूप से ठोस और अचूक कार्रवाई की जा सके. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ बेहद रसूखदार लोगों पर कानून का शिकंजा कस सकता है. फिलहाल, सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि क्या ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी इस जांच की आंच से खुद को बेदाग बचा पाएंगे या फिर वे बड़ी कार्रवाई की जद में आएंगे? यह मामला अब केवल एक कथित चोरी का नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की साख का बन चुका है, जिसके निष्पक्ष जवाब का पूरा देश बेसब्री से इंतजार कर रहा है.

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