
भारत का ऑटोमोबाइल बाजार इन दिनों बेहद तेजी से बदल रहा है. पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को लेकर काफी चर्चा रही और ग्राहकों ने इन्हें पसंद भी किया, लेकिन अब हाइब्रिड कारें (Hybrid Cars) देश में एक नए और मजबूत विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. हाइब्रिड कारों को एक ऐसे बेहतरीन ऑप्शन के तौर पर देखा जा रहा है जो पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों ही तकनीकों का एक साथ जबरदस्त फायदा देती हैं. इन गाड़ियों की सबसे बड़ी खासियत इनका शानदार माइलेज और बिना किसी एक्सटर्नल चार्जिंग स्टेशन की चिंता के लंबी दूरी तय करना है. यही मुख्य वजह है कि दुनिया की कई दिग्गज ऑटो कंपनियां अब भारत के हाइब्रिड व्हीकल सेगमेंट पर बहुत बड़ा दांव लगाने जा रही हैं.
आने वाले 12 महीनों के भीतर रेनॉ (Renault), निसान (Nissan), हुंडई (Hyundai), किआ (Kia), बीवाईडी (BYD) और जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) जैसे बड़े ऑटोमोटिव ब्रांड्स भारतीय बाजार में अपने नए हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल्स को लॉन्च करने की पूरी तैयारी में हैं. कंपनियों के इस आक्रामक प्लान से न सिर्फ ग्राहकों के पास पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा विकल्प होंगे, बल्कि बाजार में भी प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ जाएगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो साल 2026-27 भारत के हाइब्रिड कार बाजार के लिए अब तक का सबसे ऐतिहासिक और टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है.
फिलहाल टोयोटा और मारुति का है दबदबा, लेकिन अब बढ़ेगी चुनौती
अगर मौजूदा भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट पर नजर डालें तो हाइब्रिड कारों के सेगमेंट में फिलहाल टोयोटा (Toyota) और मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) का पूरी तरह से एकछत्र राज है. बाजार में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा (Grand Vitara), टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर (Urban Cruiser Hyryder) और टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस (Innova Hycross) जैसी गाड़ियां इस सेगमेंट में हर महीने बंपर बिक्री दर्ज कर रही हैं. इनके अलावा जापानी कार निर्माता कंपनी होंडा (Honda) भी अपनी प्रीमियम सेडान सिटी ई:एचईवी (City e:HEV) के साथ इस रेस में बनी हुई है. हालांकि, अब बाजार में कई नई कंपनियों के धमाकेदार एंट्री करने से यह मुकाबला आने वाले समय में और भी ज्यादा दिलचस्प और कड़ा होने की उम्मीद है.
रेनॉ ला सकती है अपनी आइकॉनिक नई डस्टर हाइब्रिड (Duster Hybrid)
फ्रांसीसी कार निर्माता कंपनी रेनॉ (Renault) भारत में अपनी सबसे लोकप्रिय एसयूवी डस्टर के न्यू-जेनेरेशन मॉडल को हाइब्रिड तकनीक के साथ पेश करने जा रही है. कंपनी अपनी नई डस्टर हाइब्रिड को साल 2026 के आगामी फेस्टिव सीजन (त्योहारी सीजन) के दौरान भारतीय बाजार में उतार सकती है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह कार पहले से ही अपनी बेहतरीन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के लिए काफी तारीफें बटोर रही है. अपने बेमिसाल माइलेज, स्पोर्टी लुक और बिल्कुल नए मॉडर्न डिजाइन के दम पर यह भारत में आते ही मारुति ग्रैंड विटारा और टोयोटा हाइराइडर जैसी स्थापित गाड़ियों को सीधी और कड़ी टक्कर दे सकती है.
रेनॉ बिगस्टर, निसान टेक्टॉन और बीवाईडी की 1,200 किमी रेंज वाली एसयूवी पर नजर
रेनॉ केवल डस्टर तक ही सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि कंपनी अपनी एक और बड़ी और प्रीमियम 7-सीटर एसयूवी बिगस्टर (Bigster) को भी भारत लाने की योजना बना रही है. यह एसयूवी ज्यादा केबिन स्पेस और बड़े परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर खास तौर पर तैयार की जा रही है. दूसरी तरफ, रेनॉ की पार्टनर कंपनी निसान (Nissan) भारत के लिए अपनी नई टेक्टॉन (Tekton) एसयूवी पर तेजी से काम कर रही है. यह कार डस्टर के ही एडवांस प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी और पूरी उम्मीद है कि इसमें भी कंपनी दमदार हाइब्रिड तकनीक देगी.
ग्लोबल मार्केट में धूम मचाने वाली चीन की दिग्गज इलेक्ट्रिक कार कंपनी बीवाईडी (BYD) भी भारत में अपनी ‘सील यू डीएम-आई’ (Seal U DM-i) या ‘सीलायन 6’ (Sealion 6) नाम से एक बेहद आधुनिक प्लग-इन हाइब्रिड एसयूवी लाने की तैयारी में है. कंपनी का दावा है कि यह शानदार एसयूवी फुल टैंक और फुल चार्ज पर एक बार में करीब 1,200 किलोमीटर तक की अविश्वसनीय दूरी तय कर सकती है. इसके साथ ही, भारत का जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) भी साल 2027 की शुरुआत में अपनी पहली प्लग-इन हाइब्रिड एसयूवी को आधिकारिक तौर पर पेश करने की रणनीति बना रहा है.
हुंडई और किआ भी हाइब्रिड सेगमेंट में करने जा रही हैं धमाका
भारतीय कार बाजार में दूसरे नंबर पर काबिज हुंडई (Hyundai) भी अब हाइब्रिड रेस में पीछे नहीं रहना चाहती. हुंडई भारत में अपनी पहली प्योर हाइब्रिड कार को साल 2027 तक लॉन्च कर सकती है, जिसके एक धांसू एसयूवी मॉडल होने की सबसे ज्यादा संभावना है. वहीं, हुंडई की ही सहयोगी कंपनी किआ (Kia) भी भारतीय ग्राहकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर सोरेंटो हाइब्रिड (Sorento Hybrid) और कार्निवल हाइब्रिड (Carnival Hybrid) जैसे बड़े और लग्जरी मॉडल्स को भारत लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. ये दोनों ही गाड़ियां प्रीमियम और आलीशान सफर पसंद करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर पेश की जाएंगी.
भारतीय ग्राहकों के बीच आखिर क्यों बढ़ रही है हाइब्रिड कारों की डिमांड?
देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार ऊंची कीमतें, हर मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बेहतर माइलेज की बढ़ती जरूरत और देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (नेटवर्क) की सीमित उपलब्धता ऐसी बड़ी वजहें हैं, जो हाइब्रिड कारों की डिमांड को रॉकेट की रफ्तार दे रही हैं. हाइब्रिड कारें बिना किसी बाहरी बिजली सोर्स या चार्जिंग के भी चलते-चलते अपनी बैटरी खुद चार्ज कर लेती हैं और बेहतरीन फ्यूल एफिशिएंसी (ईंधन की बचत) देती हैं. वहीं, दूसरी ओर प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) कारों में ग्राहकों को यह फायदा मिलता है कि वे जरूरत पड़ने पर अपनी कार की बैटरी को घर या बाहर किसी भी चार्जिंग पॉइंट से सीधे चार्ज भी कर सकते हैं.
हालाँकि, इन हाइब्रिड कारों के सामने वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती इन पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स है. भारत में जहां पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर सरकार केवल 5 फीसदी का मामूली जीएसटी (GST) वसूलती है, वहीं हाइब्रिड कारों पर काफी ज्यादा टैक्स देना पड़ता है. यही मुख्य कारण है कि हाइब्रिड मॉडल्स की शुरुआती कीमतें अक्सर सामान्य कारों से काफी महंगी होती हैं. देश की तमाम बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां लंबे समय से सरकार से हाइब्रिड वाहनों पर टैक्स की दरों को कम करने की पुरजोर मांग कर रही हैं.
भारतीय ऑटो बाजार की आगे क्या है भविष्य की तस्वीर?
आने वाले सालों में भारत का ऑटोमोबाइल बाजार अब केवल पारंपरिक पेट्रोल, डीजल या विशुद्ध रूप से इलेक्ट्रिक (EV) तक ही सीमित नहीं रहने वाला है. भविष्य की तस्वीर साफ है कि आने वाले समय में हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड, सीएनजी (CNG) और पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन भारतीय सड़कों पर एक साथ कदमताल करते नजर आएंगे. ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि कार कंपनियां भारत में इन हाइब्रिड गाड़ियों का स्थानीय स्तर पर उत्पादन (लोकल प्रोडक्शन) बढ़ाने और इनकी कीमतों को आम ग्राहकों के बजट में रखने में कामयाब हो जाती हैं, तो आने वाले समय में हाइब्रिड कारें देश से डीजल वाहनों को पूरी तरह रिप्लेस कर उनका एक सबसे मजबूत और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बन सकती हैं.
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