Tuesday , 16 June 2026

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: एसआईटी जांच से ठीक पहले आया ट्रस्ट का पहला आधिकारिक बयान, कहा- ‘दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी’

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान रामलला के भव्य और दिव्य मंदिर में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इन दिनों एक ऐसे अप्रत्याशित विवाद के केंद्र में आ गई है, जिसने पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश को झकझोर कर रख दिया है. राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर उठे बड़े सवालों और कर्मचारियों पर लगे गबन के आरोपों के बीच अब इस पूरे मामले की कमान विशेष जांच दल (SIT) ने संभाल ली है. एसआईटी की हाई-प्रोफाइल टीम के अयोध्या पहुंचने से ठीक पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस पूरे मामले पर पहली बार आधिकारिक और बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. ट्रस्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि उसे सरकार की इस जांच से रत्ती भर भी आपत्ति नहीं है, बल्कि उसने खुद ही सरकार से इस पूरे नेक्सस की स्वतंत्र जांच कराने का लिखित अनुरोध किया था ताकि दुनिया भर के रामभक्तों के मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब मिल सके.

ट्रस्ट के अनुरोध पर मात्र 15 घंटे के भीतर हुआ SIT का गठन, निष्पक्ष जांच का भरोसा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल जी राव ने इस पूरे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से ट्रस्ट और बैंक के उच्च स्तर पर इंटरनल ऑडिट की प्रक्रिया चल रही थी. इसी ऑडिट के दौरान वित्तीय लेन-देन में कई तरह की गंभीर विसंगतियां और संदिग्ध बातें सामने आईं, जिसके बाद रामभक्तों के बीच किसी भी प्रकार के भ्रम या संशय की स्थिति को रोकना बेहद जरूरी था. उन्होंने बताया कि ट्रस्ट शुरू से ही चाहता था कि पूरे मामले की निष्पक्ष और देश की सबसे बड़ी एजेंसी से जांच हो ताकि व्यवस्था की शुचिता बनी रहे.

इसी पारदर्शी उद्देश्य के तहत ट्रस्ट के महासचिव ने उत्तर प्रदेश सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करते हुए एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय विशेष जांच दल गठित करने का विशेष अनुरोध किया था. गोपाल जी राव के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेहद कड़ा और त्वरित एक्शन लिया. सरकार ने महज 15 घंटे के भीतर ही तीन सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन कर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट इस जांच में एजेंसियों को हर संभव दस्तावेज और सहयोग उपलब्ध कराएगा.

मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा हिरासत में, पूछताछ में उगल रहा है राज

उधर दूसरी तरफ, अयोध्या पहुंची स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम और स्थानीय स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने अपनी ताबड़तोड़ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस सूत्रों से मिल रही पुख्ता जानकारी के अनुसार, राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि की गिनती (कैश काउंटिंग) से जुड़े मुख्य कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में ले लिया गया है. जांच एजेंसियां उसे किसी गुप्त स्थान पर रखकर लगातार मैराथन पूछताछ कर रही हैं.

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब रेड के दौरान आरोपी कर्मचारी के पैतृक घर से करीब 10 लाख रुपये की भारी-भरकम नकद राशि बरामद होने की चर्चा सामने आई है. जांच एजेंसियां अब इस बात की कड़ाई से तफ्तीश कर रही हैं कि एक मामूली वेतन पाने वाले कर्मचारी के पास इतनी बड़ी नकद रकम कहां से आई और इस काले खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है. हालांकि, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अभी तक इस बरामद राशि को लेकर कोई भी आधिकारिक अंतिम बयान या प्रेस नोट जारी नहीं किया है.

गोबर के ढेर से लेकर अलमारी तक छिपाई थी नकदी, दूसरे कर्मचारी पर भी कस रहा शिकंजा

गांव से लेकर सोशल मीडिया तक मचा हड़कंप: स्थानीय ग्रामीणों और जमीनी सूत्रों के मुताबिक, जब जांच टीम ने आरोपी के घर पर छापेमारी की, तो नकदी को छुपाने के लिए अपनाए गए हथकंडे देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए. बताया जा रहा है कि कुछ रकम तो घर की अलमारियों और कपड़ों के बीच छिपाकर रखी गई थी, जबकि बड़ी मात्रा में नकदी को कथित तौर पर घर के पीछे बने गोबर के ढेर के अंदर पॉलिथीन में लपेटकर दबाया गया था. हालांकि, इस बात की पूरी सच्चाई विस्तृत फॉरेंसिक और आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी.

इस सनसनीखेज गबन कांड में सिर्फ लवकुश ही नहीं, बल्कि मंदिर के चढ़ावा काउंटिंग रूम में तैनात एक अन्य साथी कर्मचारी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की खबर है. सूत्र बताते हैं कि इन दोनों ही कर्मचारियों के कंधों पर रामलला के चरणों में आने वाले करोड़ों के चढ़ावे को गिनने और उसे सुरक्षित बैंक खातों में जमा कराने की मुख्य जिम्मेदारी थी. इसी वजह से जांच एजेंसियां इन दोनों के पिछले कई महीनों के वित्तीय रिकॉर्ड, पर्सनल बैंक खाते, बेनामी संपत्ति विवरण और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही हैं.

आरोपी के पिता का दावा- ‘मेरा बेटा निर्दोष है, घर की जमीन गिरवी रखकर लाए थे पैसे’

इस बीच, मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव करते हुए उसे पूरी तरह निर्दोष बताया है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके बेटे को इस साजिश में फंसाया जा रहा है और जांच के बाद सच सबके सामने आ जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह बात जरूर स्वीकार की कि जांच टीम को उनके घर से कुछ नकदी मिली है, लेकिन उनका दावा है कि फैजाबाद (अयोध्या) में बन रहे नए मकान के निर्माण के लिए उन्होंने अपनी कृषि भूमि (खेती की जमीन) को गिरवी रखा था और यह पैसा उसी जमीन के बदले मिला था. अब एसआईटी की टीम आरोपी के पिता द्वारा किए जा रहे इस जमीन गिरवी रखने वाले दावों के दस्तावेजों की भी सत्यता की जांच कर रही है.

आईएएस विजय विश्वास पंत करेंगे कप्तानी, 15 दिनों के भीतर देनी होगी फाइनल रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने इस तीन सदस्यीय एसआईटी टीम की कमान लखनऊ मंडल के कमिश्नर और वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी विजय विश्वास पंत को सौंपी है. इस हाई-लेवल टीम में तेजतर्रार आईपीएस (IPS) अधिकारी किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को बतौर सदस्य शामिल किया गया है. मुख्यमंत्री कार्यालय के कड़े निर्देशों के अनुसार, एसआईटी को मात्र 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी. इसके अलावा, पूरे नेक्सस का पर्दाफाश करते हुए 15 दिनों के भीतर अंतिम और विस्तृत चार्जशीट रिपोर्ट सरकार के पास जमा करनी होगी. माना जा रहा है कि आने वाले 48 घंटों में इस मामले में अयोध्या के कई और रसूखदार नाम सामने आ सकते हैं.

Check Also

Mohsin Akhtar Second Marriage: उर्मिला मातोंडकर के पूर्व पति मोहसिन अख्तर ने रचाई दूसरी शादी, निधा भट्ट संग निकाह की तस्वीरें कीं शेयर

मुंबई: बॉलीवुड की ‘रंगीला गर्ल’ उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) से अलग होने के बाद उनके …