Thursday , 4 June 2026

दिल्ली अग्निकांड: मालवीय नगर के होटल में जिंदा जले 21 लोग, खिड़कियों से कूदे मेहमान; बिना NOC चल रहा था मौत का ये खेल, सामने आई 5 बड़ी लापरवाहियां

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली का पॉश इलाका मालवीय नगर बुधवार की सुबह गोलियों की गूंज से नहीं, बल्कि चीख-पुकार और धुएं के गुबार से दहल उठा। यहां स्थित ‘फ्लोरिस स्टे’ (Flourish Stay B&B) होटल-रेस्टोरेंट में सुबह-सुबह लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस दिल दहला देने वाले हादसे में विदेशी नागरिकों सहित 21 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं। कई लोग इस समय अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। ग्राउंड जीरो से जो तस्वीरें और कहानियां सामने आ रही हैं, वह किसी का भी कलेजा चीरने के लिए काफी हैं। यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि चंद पैसों की खातिर इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ का वो खौफनाक मंजर है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

सुबह का वो खौफनाक मंजर जब नींद बनी मौत का जाल

चश्मदीदों के मुताबिक, यह खौफनाक हादसा बुधवार सुबह करीब 8:50 बजे हुआ। जब लोग अपने दिन की शुरुआत कर रहे थे और होटल की ऊपरी मंजिलों पर ठहरे मेहमान गहरी नींद में थे, तभी बेसमेंट में स्थित रेस्तरां से अचानक आग की लपटें उठने लगीं। बेसमेंट में लगी आग का धुआं और लपटें इतनी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ीं कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरा होटल कबाड़खाने और गैस चैंबर में तब्दील हो गया।

कमरों में फंसे लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों की तरफ भागे। चीख-पुकार सुनकर दौड़े स्थानीय लोगों ने नीचे गद्दे बिछाकर कुछ लोगों को कूदने के लिए कहा। कई लोग खिड़कियों से नीचे कूदे भी, जिन्हें गंभीर चोटें आईं। लेकिन बदकिस्मती से धुएं के गुबार और बंद रास्तों के कारण कई लोग अंदर ही फंसे रह गए और दम घुटने व जलने से उनकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन संकरी गलियों और भीषण लपटों के कारण उन्हें काबू पाने में घंटों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

नियमों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई थी मौत की ये इमारत

इस दर्दनाक हादसे के बाद जब जांच शुरू हुई, तो जो खुलासे हुए वे बेहद चौंकाने वाले और प्रशासनिक व्यवस्था पर तमाचा मारने वाले हैं। ‘फ्लोरिस स्टे’ में सुरक्षा मानकों की इस कदर धज्जियां उड़ाई गई थीं कि वहां ठहरने वाले हर शख्स की जान हर वक्त खतरे में थी। जांच में सामने आई वो 5 बड़ी लापरवाहियां, जो 21 लोगों की मौत की सीधी वजह बनीं:

  • लाइसेंस 6 कमरों का, धड़ल्ले से चल रहे थे 25 कमरे: इस होटल को ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के तहत सिर्फ 6 कमरे संचालित करने की अनुमति मिली थी। लेकिन लालच की इंतिहा देखिए कि मालिकों ने पूरी इमारत को पाटते हुए 25 कमरे खड़े कर दिए। इतना ही नहीं, सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में भी कमरे बना दिए गए थे, जहां आपात स्थिति में पहुंचना नामुमकिन था।

  • बिना फायर NOC के चल रहा था मौत का खेल: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दिल्ली के व्यस्त इलाके में चल रहे इस होटल के पास फायर सेफ्टी का ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) था ही नहीं। दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि होटल बिना बुनियादी अग्निशमन उपकरणों के ही धड़ल्ले से चल रहा था।

  • इकलौते निकास द्वार पर जड़ा था ताला: जब आग लगी तो बेसमेंट रेस्तरां का एकमात्र मुख्य चैनल गेट ताले से बंद था। भागने का कोई दूसरा रास्ता (फायर एस्केप) न होने और निकास मार्ग बेहद संकरा होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए। यही वजह रही कि लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।

  • समय पर नहीं मिली मेडिकल मदद: स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि दमकल की गाड़ियां तो समय पर पहुंच गईं, लेकिन घायल और झुलसे लोगों को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस काफी देर से आई। समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण भी कुछ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

  • अवैध निर्माण और मानकों की अनदेखी: इस पूरी बिल्डिंग और रेस्तरां के निर्माण के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से जरूरी मंजूरियां नहीं ली गई थीं। बिना किसी नक्शे और सुरक्षा ऑडिट के यह पूरी इमारत अवैध रूप से खड़ी की गई थी।

मुख्य आरोपी मालिक गिरफ्तार, मेडिकल टूरिज्म पर आए विदेशी भी हुए शिकार

इस भीषण अग्निकांड के बाद दिल्ली पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए होटल बिल्डिंग के मालिक लवकेश बाजाज को गिरफ्तार कर लिया है। मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (गैर इरादतन हत्या के तहत मामला) समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। शुरुआती तफ्तीश में यह बात भी सामने आई है कि इस होटल में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे, जो इलाज के सिलसिले में भारत आए थे (मेडिकल टूरिस्ट)। अपनों के इलाज के लिए दिल्ली आए इन विदेशियों को क्या पता था कि वह जिस जगह ठहर रहे हैं, वही उनका श्मशान बन जाएगी।

सवालों के घेरे में प्रशासन: आखिर कब जागेगा तंत्र?

इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली नगर निगम (MCD), फायर डिपार्टमेंट और लाइसेंसिंग अथॉरिटी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यह दिल्ली में कोई पहला हादसा नहीं है, इससे पहले भी उपहार सिनेमा से लेकर मुंडका और अनाज मंडी जैसे अग्निकांडों में दर्जनों लोग जान गंवा चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर बिना फायर NOC और बिना वैध लाइसेंस के इतने लंबे समय से यह होटल प्रशासन की नाक के नीचे कैसे चल रहा था? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे थे? अब देखना होगा कि इस बार कार्रवाई सिर्फ एक होटल मालिक की गिरफ्तारी तक सिमट कर रह जाती है या उन भ्रष्ट अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी जिनकी लापरवाही की वजह से आज 21 घर तबाह हो गए।

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