न्यूयॉर्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरी साजिश के पीछे ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) द्वारा प्रशिक्षित एक बेहद खतरनाक इराकी आतंकवादी का हाथ था, जिसने इवांका ट्रंप को मौत के घाट उतारने की बकायदा कसम खाई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए न केवल इस खूंखार इराकी आतंकी को धर दबोचा, बल्कि उसके पास से फ्लोरिडा में स्थित इवांका ट्रंप के आलीशान आवास का बेहद खुफिया नक्शा भी बरामद किया है। इस खुलासे के बाद से ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा चक्र में हड़कंप मच गया है।
कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने का खूनी प्लान
जांच में जो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, उनके मुताबिक इस पूरी खतरनाक साजिश के तार करीब छह साल पहले बगदाद में हुए एक अमेरिकी ड्रोन हमले से जुड़े हैं। इस हमले में मारे गए ईरानी सैन्य प्रमुख कासिम सुलेमानी की मौत का खूनी बदला लेने के लिए ही यह पूरा ताना-बाना बुना गया था। गिरफ्तार किए गए आतंकी मोहम्मद बाकिर साद दाऊद अल-सादी के सिर पर सुलेमानी की मौत का बदला लेने का खून सवार था, क्योंकि वह सुलेमानी को अपने पिता के समान मानता था। अल-सादी ने सोशल मीडिया पर इवांका ट्रंप और उनके पति जैरेड कुशनर के फ्लोरिडा स्थित महलनुमा घर का नक्शा तक पोस्ट कर दिया था। उसने खुलेआम धमकी दी थी कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस भी उन्हें उसकी पहुंच से नहीं बचा पाएगी और उनका खात्मा करना महज कुछ ही समय की बात है। शादी से पहले यहूदी धर्म अपनाने वाली इवांका ट्रंप इस पूरी साजिश के केंद्र में थीं।

तुर्की में गिरफ्तारी और वीआईपी इराकी पासपोर्ट का सनसनीखेज सच
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में घूम रहे अल-सादी को बीती 15 मई 2026 को तुर्की से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह चकमा देकर रूस भागने की फिराक में था। प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे अमेरिका लाया जा चुका है। उस पर यूरोप और अमेरिका की धरती पर करीब 18 आतंकी हमलों और कोशिशों को अंजाम देने के बेहद गंभीर आरोप हैं। इन हमलों में मार्च 2026 में एम्स्टर्डम के एक बैंक पर बमबारी, टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर अंधाधुंध गोलीबारी, लंदन में यहूदियों पर चाकू से जानलेवा हमला और बेल्जियम व रॉटरडैम में धार्मिक स्थलों पर आगजनी जैसी कई जघन्य वारदातें शामिल हैं। वह कताइब हिजबुल्लाह और आईआरजीसी दोनों ही प्रतिबंधित संगठनों के लिए एक सक्रिय और बेहद शातिर गुर्गे के रूप में काम कर रहा था।
सरकारी रसूख की आड़ में चल रहा था दहशत का ग्लोबल नेटवर्क
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात अल-सादी के पास से मिला इराक का आधिकारिक ‘सर्विस पासपोर्ट’ है। यह एक ऐसा वीआईपी पासपोर्ट होता है जो केवल इराक के प्रधानमंत्री की विशेष सहमति से बेहद खास सरकारी कर्मचारियों को ही जारी किया जाता है। इसी प्रभावशाली पासपोर्ट की आड़ में वह दुनिया भर की सुरक्षा जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर बेहद आसानी से अलग-अलग देशों के वीजा हासिल कर लेता था। इतना ही नहीं, अपने आतंकी नेटवर्क को कानूनी रूप से छिपाने और फंडिंग के लिए उसने बाकायदा एक ट्रैवल एजेंसी भी खोल रखी थी। वह सोशल मीडिया पर भी अपनी पैठ बनाए हुए था, जहां वह दुनिया के मशहूर पर्यटन स्थलों पर खिंचवाई गई अपनी तस्वीरों के साथ साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें पोस्ट कर अपने निशाने पर आए लोगों को डराया और धमकाया करता था। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल और खूंखार आतंकी को न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन जेल के बेहद सुरक्षित और तन्हाई वाले एकांत कारावास (सोलिट्री कन्फाइनमेंट) में कड़ी निगरानी के बीच रखा गया है।
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