अहमदाबाद। अपराध की दुनिया से निकलकर मायानगरी मुंबई में अपनी असली पहचान को इस कदर दफन कर देना कि पुलिस तो दूर, लाखों-करोड़ों दर्शक भी धोखा खा जाएं—यह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा लगता है। लेकिन, गुजरात में एक शातिर अपराधी ने मशहूर ठग ‘नटवरलाल’ की तर्ज पर कानून की आंखों में धूल झोंकने का ऐसा ही एक सनसनीखेज कारनामा कर दिखाया। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पा चुका एक खूंखार कैदी गुजरात हाईकोर्ट से पैरोल मिलने के बाद फरार हो गया और नाम बदलकर बॉलीवुड व साउथ की सुपरहिट फिल्मों में काम करने लगा। आखिरकार, खुफिया तंत्र और एक मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने इस बेहद चालाक हत्यारे को 12 साल बाद सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
पैरोल पर बाहर आते ही हुआ रफूचक्कर, बदला नाम और हुलिया
करीब 12 साल तक कानून से लुका-छिपी का खेल खेलने वाले इस शातिर मुजरिम की पहचान हेमंत नागिनदास पुरुषोत्तम दास मोदी के रूप में हुई है, जिसे फिल्मी दुनिया में लोग ‘स्पंदन मोदी’ के नाम से जानते थे। अहमदाबाद पुलिस की डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच (DCB) ने उसे गुरुवार को घेराबंदी कर धर दबोचा। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, हेमंत को साल 2005 में हुए नरेंद्र उर्फ नैनो यशवंत कांबले की सनसनीखेज हत्या के मामले में कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई थी। सजा काटने के लिए उसे पहले साबरमती सेंट्रल जेल और बाद में मेहसाणा जेल में शिफ्ट किया गया था।
‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ से लेकर ‘जयेशभाई जोरदार’ तक में किया अभिनय
करीब छह साल जेल की चक्की पीसने के बाद 25 जुलाई 2014 को गुजरात हाईकोर्ट ने हेमंत मोदी को 30 दिन की पैरोल मंजूर की थी, लेकिन जेल की दहलीज से बाहर कदम रखते ही वह फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए सबसे पहले पाटन जिले में करीब एक साल का वक्त काटा। इसके बाद उसने अपना फर्जी नाम ‘ट्विंकल मुकुंद दवे’ रख लिया और सीधे मुंबई (मायानगरी) का रुख कर लिया। थिएटर से शुरुआत कर उसने धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पैठ बना ली। नकली पहचान के दम पर उसने अमिताभ बच्चन और आमिर खान की बड़े बजट की फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’, रणवीर सिंह स्टारर ‘जयेशभाई जोरदार’ और आदित्य रॉय कपूर व सारा अली खान की आगामी फिल्म ‘मेट्रो… इन दिनों’ में भी अहम भूमिकाएं निभा डालीं।
मोहनलाल की फिल्म सहित 20 गुजराती फिल्मों और सीरियलों में आया नजर
स्पंदन मोदी के छद्म नाम से वह सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि रीजनल और साउथ सिनेमा में भी सक्रिय रहा। वह मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘एल-2: एम्पुरान’ (L2: Empuraan) सहित करीब 20 गुजराती फिल्मों, कई लोकप्रिय टीवी सीरियलों और 17 कमर्शियल नाटकों में बतौर अभिनेता काम कर चुका था। अपनी पुरानी और असली पहचान को पूरी तरह मिटाने के लिए हेमंत ने अपने माता-पिता, पुराने दोस्तों और यहां तक कि अपनी पत्नी से भी सारे रिश्ते तोड़ लिए थे। वह किसी भी तरह की डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूर रहता था, जिसके कारण पुलिस के लिए उसका सुराग पाना नामुमकिन हो गया था।
2025 में अहमदाबाद लौटते ही मुखबिर के जाल में फंसा ‘स्पंदन’
अपनी फरारी के लंबे समय बाद साल 2025 में जब हेमंत किसी सिलसिले में दोबारा अहमदाबाद वापस लौटा, तो उसकी किस्मत ने उसका साथ छोड़ दिया। शहर में घूम रहे इस शातिर अपराधी को एक पुराने मुखबिर ने पहचान लिया और तुरंत इसकी गुप्त सूचना क्राइम ब्रांच को दे दी। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए जेल रिकॉर्ड में दर्ज उसके पुराने शारीरिक हुलिए, निशानों और कद-काठी का बारीकी से मिलान किया, जो मौजूदा स्पंदन मोदी से हूबहू मैच कर गया। 12 साल बाद मिली इस बड़ी कामयाबी के बाद अब पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि फरारी के दौरान मुंबई फिल्म जगत में पैर जमाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किन-किन सफेदपोश लोगों ने उसकी मदद की थी।
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