Thursday , 21 May 2026

UP Road Safety: ‘हर जान कीमती है…’ सीएम योगी का कड़ा रुख, स्टंटबाजों और डग्गामार बसों पर होगी सख्त कार्रवाई, अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार को लखनऊ में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि हमारे लिए प्रत्येक नागरिक का जीवन अमूल्य है। सड़क हादसों में होने वाली मौतें न केवल एक परिवार की, बल्कि पूरे देश और राज्य की अपूरणीय क्षति हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि सड़क सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और ‘टॉप टू बॉटम’ (ऊपर से नीचे तक) हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सरकार के पिछले प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश में जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच हुई सड़क दुर्घटनाओं में 21 प्रतिशत और इन हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में 22 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सीएम योगी ने इस सुधार को और बेहतर करने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ एक ठोस और प्रभावी कार्ययोजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं।

स्टंटबाजी और नशे में ड्राइविंग करने वालों की खैर नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखीमपुर खीरी, अमरोहा, आगरा और अलीगढ़ जैसे जनपदों में हुए दर्दनाक मार्ग दुर्घटनाओं पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की। उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिए कि सड़कों पर स्टंटबाजी, ओवर स्पीडिंग और शराब के नशे में वाहन चलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए। ऐसे लापरवाह चालकों के खिलाफ तत्काल कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, सड़कों पर अवैध रूप से दौड़ने वाले डंफरों, ओवरलोडेड वाहनों और बिना परमिट वाली डग्गामार बसों के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर जब्तीकरण की कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।

बार-बार चालान होने पर निरस्त होगा ड्राइविंग लाइसेंस

यातायात नियमों को ताक पर रखने वाले वाहन स्वामियों के लिए मुख्यमंत्री ने बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन का बार-बार चालान हो रहा है, तो केवल जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा। ऐसे मामलों में वाहन का परमिट और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस तत्काल निरस्त करने की कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न करें और स्कूली वाहनों का शत-प्रतिशत फिटनेस टेस्ट अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करवाएं। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के कोई भी स्कूली वाहन सड़क पर नहीं उतरना चाहिए।

सड़कों से हटेंगे अवैध स्टैंड, पार्किंग के लिए कड़े नियम

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले जाम और अवैध कब्जों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग को स्पष्ट आदेश दिया है कि सड़कों के किनारे से सभी अवैध बस और ऑटो स्टैंड तत्काल हटाए जाएं। सड़कों पर बेतरतीब ढंग से होने वाली पार्किंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और केवल निर्धारित उपयुक्त स्थलों पर ही वाहनों की पार्किंग सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) के अधिकारियों को भी फील्ड में उतरने के निर्देश दिए हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल पूरी तरह फिट बसें ही डिपो से बाहर निकलें और वे अपने तय स्टैंड पर ही खड़ी हों। चालकों और परिचालकों के नियमित स्वास्थ्य व आंखों के परीक्षण को भी अनिवार्य कर दिया गया है।

ब्लैक स्पॉट का होगा खात्मा, चौराहों पर लगेंगे टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर

दुर्घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और प्रांतीय मार्गों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को चिह्नित कर तय समय सीमा के भीतर उनका तकनीकी समाधान निकाला जाए। सड़कों पर आवश्यक स्थानों और चौराहों पर टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं और उपयुक्त साइन बोर्ड लगाए जाएं। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे और हाईवे पर नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाने तथा दुर्घटना की स्थिति में घायलों को तुरंत ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मुहैया कराने के लिए नजदीकी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखने और एम्बुलेंस की समुचित व्यवस्था करने की बात कही।

जागरूकता के लिए गूंजेंगे लाउडस्पीकर, ‘जीरो फैटिलिटी’ स्कीम से बचीं 566 जानें

सीएम योगी ने कहा कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं जागरूकता के अभाव में होती हैं। इसके लिए चौराहों, टोल प्लाजा और व्यस्त बाजारों में ‘पब्लिक एड्रेस सिस्टम’ (लाउडस्पीकर) के माध्यम से लोगों को लगातार यातायात नियमों जैसे- हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और ओवरस्पीडिंग न करने के प्रति जागरूक किया जाए।

बैठक में यातायात पुलिस के अधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां सभी 75 जिलों के 487 संवेदनशील (क्रिटिकल) पुलिस थानों में ‘जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना’ लागू की गई है। इसके तहत 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों का गठन किया गया है, जिसमें उपनिरीक्षक और मुख्य आरक्षी तैनात हैं। इस विशेष योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते बीते चार महीनों में सड़क हादसों का शिकार होने वाले 566 लोगों की जान समय पर इलाज और मदद मिलने से बचाई जा चुकी है। यातायात पुलिस को आधुनिक बनाने के लिए सड़क सुरक्षा कोष से 25 चार पहिया इंटरसेप्टर, 62 दोपहिया इंटरसेप्टर और 82 स्पीड लेजर गन भी जिलों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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