Thursday , 21 May 2026

क्या सड़ने लगी है ट्विशा शर्मा की डेड बॉडी? पोस्टमार्टम रिपोर्ट के वो खुलासे, जिसने बढ़ाई उलझन, डीएनए और विसरा जांच पर टिकी नजर

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स में हुई 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला हर गुजरते दिन के साथ और गहराता जा रहा है। शादी के महज 5 महीने बाद हुई इस मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। भोपाल पुलिस ने मृतका के परिवार को एक आधिकारिक पत्र जारी कर भोपाल एम्स (AIIMS) की मोर्चरी में रखे शव को जल्द से जल्द ले जाने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि शव लंबे समय से मोर्चरी में रखा होने के कारण अब उसके डिकंपोज (क्षत-विक्षत) होने की आशंका बढ़ गई है। इस बीच पुलिस ने केस डायरी को कोर्ट में पेश कर दिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, शरीर पर मिले चोटों के निशान

मामले में फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई एम्स भोपाल की विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसने इस रहस्य को और उलझा दिया है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विशा की मौत की प्राथमिक वजह गले में फंदा लगने (लिगेचर हैंगिंग) से दम घुटना बताई गई है। हालांकि, डॉक्टरों को मृतका के शरीर के अन्य हिस्सों पर मौत से पहले (एंटेमॉर्टम) की कई चोटें भी मिली हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये चोटें साधारण प्रकृति की हैं, जो किसी कुंद वस्तु (ब्लंट फोर्स) के प्रभाव या टकराव से लगी प्रतीत होती हैं। इन चोटों के सामने आने के बाद से ही हत्या और आत्महत्या की गुत्थी और उलझ गई है।

‘गायब फंदे’ ने पुलिस को चौंकाया, डीएनए और विसरा जांच पर टिकी नजर

इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह सामने आया है कि शव परीक्षण के समय फंदे की सामग्री (लिगेचर मटेरियल) न तो मौके पर लगी हुई अवस्था में मिली और न ही जांच टीम के सामने पेश की गई। आखिर वह फंदा कहां गायब हो गया, यह अब तक एक बड़ा सवाल बना हुआ है। वहीं, किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ या जहर (कन्कोमिटेंट इंटॉक्सिकेशन) की आशंका को दूर करने के लिए ट्विशा के रक्त के नमूने, विसरा और ओमेंटल फैट को सुरक्षित करके फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेज दिया गया है। इसके साथ ही, संघर्ष की स्थिति का पता लगाने के लिए नाखूनों के नमूने (नेल क्लिपिंग्स) भी डीएनए जांच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।

मौत से एक हफ्ते पहले गर्भसमापन और टाइम ऑफ डेथ का कनेक्शन

फॉरेंसिक डॉक्टरों के प्रारंभिक चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि ट्विशा की मौत 13 मई 2026 की रात लगभग 1 बजकर 59 मिनट से 6 घंटे के भीतर हुई है। डॉक्टरों ने निष्पक्षता के लिए पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई है। रिपोर्ट में एक और बात सामने आई है कि घटना से करीब एक सप्ताह पहले कथित तौर पर ट्विशा का एमटीपी (गर्भसमापन) कराया गया था, जिसके चलते अब मृतका के गर्भाशय (यूटेरस) की हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच भी की जा रही है।

दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा परिवार

ट्विशा के माता-पिता और परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि यह सीधा-सीधा दहेज उत्पीड़न और सुनियोजित हत्या का मामला है। निष्पक्ष जांच और मौत का असली सच सामने लाने के लिए पीड़िता का परिवार अब दिल्ली एम्स (AIIMS Delhi) में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़ा हुआ है। परिवार ने शव को तब तक लेने से इनकार करने के संकेत दिए हैं जब तक कोर्ट उनकी इस मांग पर फैसला नहीं सुना देता। फिलहाल, कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही शव के अंतिम संस्कार या दोबारा पोस्टमार्टम को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

पूर्व जज सास को मिली अग्रिम जमानत, पति समर्थ सिंह अब भी फरार

चूंकि ट्विशा की शादी को महज 5 महीने ही हुए थे, इसलिए कानून के मुताबिक पुलिस इस मामले की बेहद बारीकी और गहनता से तफ्तीश कर रही है। दूसरी तरफ, आरोपी पक्ष यानी ट्विशा के पति समर्थ सिंह के वकील और उनकी मां (जो कि एक पूर्व न्यायाधीश हैं) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि ट्विशा लंबे समय से मानसिक तनाव और गहरे अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही थी। इस कानूनी और बयानी जंग के बीच, मृतका की सास (पूर्व जज) को उनकी उम्र और कानूनी सेवाओं के आधार पर अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह पुलिस की गिरफ्त से दूर है और लगातार फरार चल रहा है। पुलिस मामले से जुड़े हर छोटे-बड़े साक्ष्य को टटोलने और आरोपी की तलाश में जुटी हुई है।

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