उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और अवैध धर्मांतरण को लेकर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में मिर्ज़ापुर जनपद से एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां जिम के माध्यम से भोली-भाली युवतियों को जाल में फंसाकर उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह के 10 अभियुक्तों के खिलाफ पुलिस ने शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। पुलिस ने इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड इमरान खान और उसके साथियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम यानी गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है।
जिम में ट्रेनिंग के बहाने रचते थे साजिश, आपत्तिजनक वीडियो बनाकर करते थे ब्लैकमेल
इस पूरे सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए मिर्ज़ापुर के अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) नीतेश सिंह ने बताया कि सरकार और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जनपद में अपराधियों की धरपकड़, इनामी बदमाशों, गो-तस्करों और अवैध धर्म परिवर्तन में संलिप्त माफियाओं के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जांच में पता चला कि इस गैंग का लीडर इमरान खान (पुत्र इशरार अहमद) अपने साथियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित नेटवर्क चला रहा था। यह गैंग अपने आर्थिक, भौतिक और अनुचित दुनियावी लाभ के लिए हिंदू लड़कियों को जिम में ट्रेनिंग देने के बहाने बहला-फुसलाकर अपनी साजिश का शिकार बनाता था। इसके बाद आरोपी उनके साथ शारीरिक संबंध बनाते थे और उनके आपत्तिजनक फोटो व वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करते हुए जबरन पैसों की वसूली और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते थे।
19 जनवरी को दर्ज हुआ था मुकदमा, जांच में सामने आई आरोपियों की खौफनाक हैवानियत
पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत इसी साल 19 जनवरी 2026 को हुई थी, जब एक पीड़ित महिला ने थाना कोतवाली देहात में आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी थी। महिला की तहरीर के आधार पर पुलिस ने शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 308(5), 352, 351(2) और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5(1) के तहत केस दर्ज किया था। लेकिन जब पुलिस ने इस मामले की गहराई से विवेचना की और साक्ष्य जुटाए, तो आरोपियों की हैवानियत और बड़ी साजिश की परतें खुलती चली गईं।
आईटी एक्ट और बीएनएस की गंभीर धाराएं जुड़ीं, 17 अप्रैल को कोर्ट में पेश हुई चार्जशीट
साक्ष्य संकलन के आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना के दौरान पुलिस ने मुकदमों में कई अन्य सख्त धाराएं भी जोड़ दीं। इसमें बीएनएस की धारा 64(1), 61(2), 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 238, 111 और आईटी एक्ट की धारा 67बी शामिल की गई। पुलिस ने पूरी मुस्तैदी के साथ जांच पूरी करते हुए 17 अप्रैल 2026 को ही कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ समाज विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और एक संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जिसके चलते अब इन पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है।
मिर्ज़ापुर जेल में बंद हैं सभी 10 आरोपी, अवैध कमाई से खड़ी की गई संपत्ति होगी कुर्क
एएसपी नीतेश सिंह ने साफ किया है कि इस गिरोह के सभी 10 आरोपी वर्तमान समय में मिर्ज़ापुर जिला कारागार में बंद हैं। पुलिस अब इस मामले में एक और बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद अब इन अपराधियों द्वारा अवैध रूप से और डरा-धमकाकर अर्जित की गई संपत्तियों को चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही जिला प्रशासन के सहयोग से इन सभी संपत्तियों को कुर्क और ज़ब्तीकरण (Seizure) करने की मुनादी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का दुस्साहस न कर सके।
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