Monday , 18 May 2026

राजस्थान से यूपी क्यों दौड़ रहे लोग? आगरा के पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भारी भीड़ की ये है बड़ी वजह

आगरा/भरतपुर। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते सैन्य संकट और युद्ध के हालातों के बीच देश भर में पेट्रोल-डीजल की संभावित किल्लत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. इस वैश्विक तनाव के बीच उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों (बॉर्डर) पर एक बेहद हैरान करने वाला और अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश की सीमा में स्थित पेट्रोल पंपों पर वाहनों की मीलों लंबी कतारें लगी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के सीमावर्ती पेट्रोल पंप पूरी तरह से वीरान और सूने पड़े हैं. स्थिति यह है कि राजस्थान के भरतपुर के लोग अपनी गाड़ियों में तेल डलवाने के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की सीमा में स्थित पंपों पर भारी संख्या में पहुंच रहे हैं. लोग न सिर्फ अपनी बाइक और स्कूटी की टंकियां फुल करवा रहे हैं, बल्कि भविष्य की आशंकाओं को देखते हुए बड़े-बड़े ड्रम और कट्टों में भी पेट्रोल-डीजल का अवैध रूप से स्टोरेज करने में जुटे हैं.

राजस्थान से ₹10 सस्ता है यूपी में पेट्रोल, वैट के अंतर ने बिगाड़ा खेल

बॉर्डर के दोनों तरफ दिखने वाले इस विरोधाभासी नजारे की सबसे बड़ी और मुख्य वजह उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार द्वारा लगाए जाने वाले वैट (Value Added Tax) का भारी अंतर है. दोनों राज्यों की टैक्स दरों में बड़ा फासला होने के चलते राजस्थान की तुलना में उत्तर प्रदेश में पेट्रोल करीब 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल 3 से 4 रुपए प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल के बीच इस भारी अंतर ने सीमावर्ती उपभोक्ताओं को यूपी की तरफ रुख करने पर मजबूर कर दिया है. टैक्स में इस जमीन-आसमान के अंतर का सीधा असर दोनों राज्यों के पेट्रोल पंपों की सेल (बिक्री) पर साफ दिखाई दे रहा है.

राजस्थान के पेट्रोल पंप संचालक दाने-दाने को मोहताज, बिक्री में भारी गिरावट

इस औंधे खेल के कारण राजस्थान के सीमावर्ती जिलों, विशेषकर भरतपुर संभाग के पेट्रोल पंप संचालक भारी मंदी और नुकसान के दौर से गुजर रहे हैं. राजस्थान के पंप मालिकों का कहना है कि स्थानीय ग्राहक तो दूर की बात है, बॉर्डर से गुजरने वाले भारी वाहन भी अब राजस्थान में पैर रखने से पहले या बाद में यूपी की सीमा से ही डीजल भरवा रहे हैं. बिक्री में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के चलते राजस्थान के पंप संचालकों के सामने अब अपने कर्मचारियों की सैलरी निकालने और पंप का मेंटेनेंस संभालने तक का संकट खड़ा हो गया है. वे लगातार राज्य सरकार से वैट की दरें कम करने की मांग कर रहे हैं ताकि उत्तर प्रदेश के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में टिक सकें.

यूपी के पंपों पर मची है भारी लूट, मैनेजर बोले- पहले से ज्यादा उमड़ रही भीड़

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती पेट्रोल पंपों पर इस समय चांदी ही चांदी कट रही है. आगरा-भरतपुर बॉर्डर पर स्थित एक प्रमुख पेट्रोल पंप के मैनेजर सनी लानवानी ने बताया कि कीमतों में अंतर के कारण वैसे तो इस बॉर्डर वाले पंप पर हमेशा ही राजस्थान के मुकाबले ज्यादा भीड़ रहती थी, लेकिन मिडिल ईस्ट के ताजा संकट और तेल की कीमतों में हुई वैश्विक बढ़ोतरी के बाद से अचानक यहां ग्राहकों की संख्या में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है. यूपी के पंपों पर दिन-रात गाड़ियों का मेला लगा हुआ है और कर्मचारियों को सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिल रही है.

संकट की आशंका से ड्रमों में तेल का स्टॉक कर रहे भरतपुर के लोग

उत्तर प्रदेश के पंपों पर तेल भरवाने पहुंचे भरतपुर के स्थानीय निवासियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में प्रति लीटर 10 रुपए की बचत बहुत बड़ी मायने रखती है. रोजाना अप-डाउन करने वाले और भारी वाहनों के मालिकों के लिए यह रकम हजारों में बैठती है, इसलिए वे कुछ किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करके भी आगरा के पंपों पर आना बेहतर समझते हैं. इसके अलावा, लोगों के मन में यह डर भी बैठ गया है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से आने वाले दिनों में कच्चे तेल की सप्लाई रुक सकती है या कीमतें आसमान छू सकती हैं. इसी डर के चलते कई लोग सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखकर बड़े-बड़े प्लास्टिक के ड्रमों में भी पेट्रोल-डीजल भरकर अपने घरों में स्टोर कर रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे सकता है.

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