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ट्रम्प ने ठुकराया ईरान का ‘शांति प्रस्ताव’: सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, कच्चा तेल $3 उछला; क्या अब छिड़ेगी भीषण जंग?

वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की दहकती आग को शांत करने की कोशिशों को रविवार को उस वक्त गहरा झटका लगा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। महीनों से जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच उम्मीद थी कि कोई बीच का रास्ता निकलेगा, लेकिन ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। इस फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3 डॉलर प्रति बैरल तक का उछाल देखा गया, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

‘मुझे यह मंजूर नहीं’: ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प का कड़ा प्रहार

ईरान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के सामने आते ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और अपनी नाराजगी जाहिर की। ट्रम्प ने दो टूक शब्दों में लिखा, “मुझे यह बिल्कुल भी पसंद नहीं है और यह किसी भी स्थिति में मंजूर नहीं है।” ट्रम्प के इस कड़े संदेश ने उन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के प्रति नरम रुख अपना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प के इस रुख से 28 फरवरी से जारी यह संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।

ईरान की ‘भारी-भरकम’ शर्तें: क्या यही बनी विवाद की जड़?

ईरानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए तेहरान ने अमेरिका को अपना जवाब भेजा था। इस प्रस्ताव में ईरान ने लेबनान में जारी संघर्ष को रोकने और व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा किया था। लेकिन, इस शांति की अपील के पीछे ईरान ने कुछ ऐसी शर्तें रखी थीं जो वाशिंगटन को चुभ गईं:

  • हर्जाने की मांग: युद्ध से हुए आर्थिक नुकसान का मुआवजा।

  • प्रतिबंधों का अंत: तेल बिक्री पर लगी रोक हटाना और सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को खत्म करना।

  • सुरक्षा की गारंटी: भविष्य में अमेरिका कभी हमला नहीं करेगा, इसकी लिखित गारंटी।

  • क्षेत्रीय संप्रभुता: होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण और संप्रभुता।

झुकने को तैयार नहीं तेहरान, पाकिस्तान की मध्यस्थता भी फेल!

ईरान ने भी अपने तेवर कड़े करते हुए साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। ईरानी पक्ष की ओर से कहा गया कि उनका प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रम्प को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि देश की गरिमा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, लेकिन ट्रम्प की ना ने फिलहाल कूटनीतिक रास्तों पर ताला लगा दिया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट का बादल

इस कूटनीतिक विफलता का असर केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने दुनिया भर के शेयर बाजारों को डरा दिया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की महंगाई दर पर पड़ेगा। फिलहाल, दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और बातचीत की मेज खाली पड़ी है।

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