Saturday , 2 May 2026

यूपी में ‘स्मार्ट मीटर’ पर महासंग्राम: आगरा से मेरठ तक भड़के लोग, कहीं उखाड़ फेंके मीटर तो कहीं घेराव; भारी पुलिस बल तैनात

लखनऊ/आगरा। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर मचा बवाल अब हिंसक विरोध में तब्दील होता जा रहा है। आगरा, मेरठ और फिरोजाबाद समेत कई बड़े शहरों में उपभोक्ताओं का धैर्य जवाब दे गया और हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। आक्रोश इतना ज्यादा था कि कई इलाकों में भीड़ ने बिजली खंभों पर लगे स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर जमीन पर फेंक दिया और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

बिलों में ‘करंट’ से बिगड़ा बजट, उपभोक्ताओं ने खोला मोर्चा

विरोध प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों का सीधा आरोप है कि जब से ये नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उनके बिजली बिलों में 2 से 3 गुना तक का इजाफा हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे पहले की तरह ही बिजली का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन बिल अब उनके बजट से बाहर जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने इसे विभाग की ‘लूट’ करार देते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के उनके घरों और मोहल्लों में ये मीटर थोपे जा रहे हैं, जिसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं है।

सड़कों पर संग्राम: मेरठ और फिरोजाबाद में भारी हंगामा

मेरठ और फिरोजाबाद के रिहायशी इलाकों में हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए जब बिजली विभाग की टीम मीटर लगाने पहुंची। स्थानीय निवासियों ने न केवल टीम को काम करने से रोका, बल्कि पहले से लगे मीटरों को भी हटा दिया। सड़कों पर घंटों तक जाम लगा रहा और सरकार विरोधी नारे गूंजते रहे। स्थिति को बिगड़ता देख जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। पुलिस अधिकारियों को भीड़ को समझाने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

विभाग की सफाई: ‘सटीक है गणना, भ्रम फैला रहे लोग’

दूसरी तरफ, जनाक्रोश के बीच बिजली विभाग के आला अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। विभाग का तर्क है कि स्मार्ट मीटर तकनीक पूरी तरह आधुनिक है और इससे बिलिंग में मानवीय गलती की गुंजाइश खत्म हो जाती है। अधिकारियों के मुताबिक, मीटर तेज नहीं चल रहे हैं, बल्कि वे पुरानी लीकेज और सटीक रीडिंग को पकड़ रहे हैं। विभाग ने आश्वासन दिया है कि जिन उपभोक्ताओं को बिल अधिक लगने की शिकायत है, उनके मीटरों की विशेष जांच कराई जाएगी और संवाद के माध्यम से समस्या सुलझाई जाएगी।

पारदर्शिता पर सवाल: क्या रुक पाएगा स्मार्ट मीटर का काम?

विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जिससे यह मामला अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। जनता की मांग है कि जब तक मीटरों की शुद्धता प्रमाणित न हो और बिलों में विसंगतियां दूर न हों, तब तक इस योजना पर रोक लगाई जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन लोगों के गुस्से को शांत कर पाता है या स्मार्ट मीटर के खिलाफ यह चिंगारी पूरे प्रदेश में फैल जाएगी।

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