
यरूशलेम/तेहरान: मिडिल ईस्ट में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण रक्तपात पर फिलहाल युद्धविराम (सीजफायर) की मुहर लग गई है। लेकिन 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस महायुद्ध ने जो जख्म दिए हैं, उनका हिसाब-किताब रोंगटे खड़े कर देने वाला है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद अब इस युद्ध का पूरा ‘डेथ डेटा’ और सैन्य नुकसान का लेखा-जोखा सामने आया है।
ईरान की मिसाइल बारिश: क्लस्टर बमों से दहला इजरायल
युद्ध के दौरान ईरान ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए इजरायल पर 650 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे चिंता की बात यह रही कि इनमें से आधी से ज्यादा मिसाइलों में ‘क्लस्टर बम’ लगे थे, जो एक साथ बड़े इलाके को श्मशान बनाने की ताकत रखते हैं।
ईरान के इन हमलों में 16 मिसाइलें सीधे रिहायशी इलाकों में गिरीं, जिससे भारी तबाही हुई। इस जंग में 20 इजरायली और विदेशी नागरिकों की जान गई, जबकि वेस्ट बैंक में 4 फिलिस्तीनी भी मारे गए। करीब 7,000 से ज्यादा लोग घायल हुए और 5,500 नागरिकों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी।
इजरायल का ‘ऑपरेशन डिस्ट्रक्शन’: 18,000 बमों से ईरान धुआं-धुआं
ईरान की मिसाइलों का जवाब इजरायल ने विनाशकारी हवाई हमलों से दिया। इजरायली वायु सेना (IAF) ने 1,000 से अधिक हमलों की लहरों में ईरान पर 18,000 से अधिक बम बरसाए। कुल 10,800 हवाई हमलों के जरिए ईरान के 4,000 से अधिक सैन्य ठिकानों को खंडहर में तब्दील कर दिया गया। इजरायल का मुख्य निशाना ईरान के मिसाइल लॉन्चर, हथियार निर्माण केंद्र, परमाणु सुविधाएं और सैन्य मुख्यालय थे।
ईरान की सैन्य शक्ति को भारी चोट: 85% एयर डिफेंस ध्वस्त
इजरायली सेना के दावों के मुताबिक, इस युद्ध ने ईरान की सैन्य कमर तोड़ दी है:
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मिसाइल लॉन्चर: ईरान के 470 लॉन्चरों में से करीब 280 (60%) को नष्ट या निष्क्रिय कर दिया गया है।
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वायु रक्षा प्रणाली: 300 से अधिक ठिकानों पर सटीक हमलों के कारण ईरान की लगभग 85 प्रतिशत एयर डिफेंस और पहचान प्रणाली अब बेकार हो चुकी है।
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परमाणु कार्यक्रम: इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान की परमाणु सुविधाओं को भारी नुकसान पहुँचाकर उसके परमाणु इरादों को कई साल पीछे धकेल दिया है।
तारीखवार तबाही: कब कितनी गिरीं मिसाइलें?
युद्ध के पहले तीन दिन सबसे ज्यादा घातक रहे। आंकड़ों के अनुसार:
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पहला दिन: तेहरान पर हमले के जवाब में ईरान ने 80 मिसाइलें दागीं।
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दूसरा दिन: करीब 60 मिसाइलें इजरायल की ओर भेजी गईं।
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तीसरा दिन: ईरान ने 30 मिसाइलें दागीं।
इसके बाद सीजफायर होने तक ईरान हर दिन औसतन 10 से 20 मिसाइलें दागता रहा। अमेरिका और इजरायल का कहना है कि इस साझा अभियान का मकसद ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के खतरे को खत्म करना और वहां की सत्ता पर दबाव बनाना था।
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