Tuesday , 5 May 2026

फिर ‘पंडित’ शब्द पर भारी बवाल : UP Police SI परीक्षा में पूछा गया ऐसा सवाल कि भड़क गए डिप्टी सीएम बृजेश पाठक, दिए जांच के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 14 और 15 मार्च को आयोजित हो रही दरोगा (SI) भर्ती परीक्षा अपने पहले ही दिन विवादों के घेरे में आ गई है। परीक्षा के हिंदी प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल और उसके ‘विवादास्पद’ विकल्पों को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र की तस्वीर वायरल होते ही हड़कंप मच गया, जिस पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ा संज्ञान लेते हुए इसे समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया है।

क्या है वो सवाल जिस पर छिड़ा है विवाद?

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे प्रश्नपत्र के सवाल नंबर 3 में अभ्यर्थियों से ‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ चुनने को कहा गया था। प्रश्न था— ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’। इस वाक्यांश के लिए जो चार विकल्प (Options) दिए गए थे, वे इस प्रकार थे: (A) निष्कपट, (B) सदाचारी, (C) पंडित और (D) अवसरवादी। इस प्रश्न में ‘अवसरवादी’ के अर्थ के रूप में ‘पंडित’ शब्द को एक विकल्प के तौर पर शामिल किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लोगों का आरोप है कि यह जानबूझकर एक विशिष्ट वर्ग को अपमानित करने की कोशिश है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का कड़ा रुख: ‘किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं’

मामला बढ़ता देख डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक लंबी पोस्ट लिखकर सरकार की मंशा साफ कर दी। उन्होंने लिखा, “उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न के विकल्पों पर हमें कड़ी आपत्ति है। किसी भी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी जाति या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को स्थान नहीं मिलना चाहिए और इस मामले की तत्काल जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

बीजेपी नेताओं ने भी उठाई कार्रवाई की मांग

सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि संगठन के स्तर पर भी इस सवाल का विरोध शुरू हो गया है। यूपी बीजेपी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने भी इस प्रश्न पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए लिखा कि वे इस प्रश्न और इसके विकल्पों से बेहद आहत हैं। उन्होंने मांग की है कि जिस भी व्यक्ति ने इस प्रश्नपत्र को तैयार किया है, उसके विरुद्ध ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो एक नजीर बने।

भर्ती बोर्ड की साख पर सवाल

इस विवाद के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की टीम भी जांच के दायरे में है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने जानबूझकर ऐसा किया या यह एक बड़ी चूक है? फिलहाल, सरकार के सख्त रुख के बाद यह तय माना जा रहा है कि प्रश्न पत्र सेट करने वाली एजेंसी और संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

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