उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। खुशरुपुर ग्राम पंचायत के भिखारीपुर मजरे में एक 55 वर्षीय किसान कन्हैयालाल की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई। बुधवार सुबह जब किसान का रक्तरंजित शव खेत में चारपाई पर मिला, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने इस मामले में मृतक के बेटे की शिकायत पर चार नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

चारपाई पर मिला खून से लथपथ शव
मिली जानकारी के अनुसार, कन्हैयालाल मंगलवार शाम करीब 6 बजे अपनी फसल की रखवाली करने के लिए घर से निकले थे। रात करीब 8 बजे उनका बेटा राकेश खाना लेकर खेत पहुंचा था और रात 1 बजे तक पिता के साथ रहने के बाद घर लौट आया था। बुधवार सुबह जब कन्हैयालाल वापस नहीं लौटे, तो राकेश दोबारा खेत पहुंचा। वहां का नजारा भयावह था; झोपड़ी के पास चारपाई पर पिता का शव खून से लथपथ पड़ा था। घटनास्थल पर टिफिन झोले में टंगा मिला और जूते दूसरी ओर बिखरे पड़े थे, जिससे संघर्ष की आशंका जताई जा रही है।
एक बिस्वा जमीन का खूनी विवाद
किसान की हत्या के पीछे मुख्य वजह जमीन का विवाद माना जा रहा है। मृतक के बेटे राकेश ने गांव के ही नंगू, उसके बेटे सोहन और दो अन्य लोगों (हरिपाल व ज्ञानी) पर हत्या का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि कन्हैयालाल ने 6 साल पहले नंगू से एक बिस्वा जमीन खरीदी थी। 6 महीने पहले जब इस जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
पुरानी रंजिश और कूटनीतिक एंगल
ग्रामीणों के बीच इस हत्याकांड को लेकर अन्य चर्चाएं भी गर्म हैं। कुछ लोगों का दबी जुबान में कहना है कि इस घटना के तार 15 साल पुराने एक मामले से भी जुड़े हो सकते हैं, जब मृतक पड़ोस की एक महिला को अपने साथ ले गया था। पुलिस इस ‘पुरानी रंजिश’ के पहलू पर भी बारीकी से नजर रख रही है।
जांच में जुटी पुलिस और फोरेंसिक टीमें
वारदात की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक प्रेमचंद्र और क्षेत्राधिकारी सोनम सिंह ने भारी पुलिस बल, फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड के साथ मौके का मुआयना किया। झोपड़ी के अंदर पैरा (पुआल) पर भी खून के निशान मिले हैं, जिससे लगता है कि हमलावर ने काफी करीब से वार किया। थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए एसओजी (SOG) समेत चार अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं। मृतक अपने पीछे पत्नी, चार बेटे और तीन बेटियों का भरा-पुरा परिवार छोड़ गया है, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।
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