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मिडिल ईस्ट में महायुद्ध! अमेरिका का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू: ईरान के 50 जहाज तबाह, अब ‘ब्लैक रेन’ का मंडराया खतरा

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। दुनिया की महाशक्ति अमेरिका ने सीधे तौर पर ईरान के सैन्य ढांचे को नेस्तनाबूद करने का अभियान छेड़ दिया है। व्हाइट हाउस की ताजा घोषणा के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान के मिसाइल उत्पादन केंद्रों और उसके नौसैनिक बेड़े को निशाना बना रही है। दूसरी ओर, ईरान ने भी पलटवार करते हुए इजराइल की तेल रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमलों का दावा किया है। इस भीषण टकराव के बीच अब ‘जहरीली बारिश’ का साया पूरे क्षेत्र पर मंडराने लगा है।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: ट्रंप के आदेश पर ईरान की घेराबंदी

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि अमेरिकी सेना ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत ईरान की सैन्य कमर तोड़ने में जुटी है। पिछले 10 दिनों से जारी इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका ने अब तक ईरान की नौसेना के 50 से अधिक जहाजों को समुद्र में दफन कर दिया है। इसमें ईरान का एक विशालकाय ड्रोन कैरियर जहाज भी शामिल है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्वास जताया है कि ईरानी मिसाइल नेटवर्क और सैन्य बुनियादी ढांचे को तबाह करने का लक्ष्य उम्मीद से बहुत पहले हासिल कर लिया जाएगा।

ईरान का पलटवार: इजराइल की हाइफा रिफाइनरी पर ड्रोन की बारिश

अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान के ‘खातम अल-अंबिया’ सशस्त्र बल मुख्यालय ने दावा किया है कि उनके ड्रोन्स ने इजराइल के हाइफा स्थित तेल रिफाइनरी और विशाल ईंधन भंडारण टैंकों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। ईरान के अनुसार, यह उनके जवाबी सैन्य अभियान की 33वीं लहर थी। तेहरान का कहना है कि यह हमला उनके अपने तेल डिपो और ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों का सीधा बदला है। दोनों देशों के बीच जारी इस ‘ऊर्जा युद्ध’ ने वैश्विक तेल बाजार में भी हलचल मचा दी है।

खौफनाक ‘ब्लैक रेन’: WHO ने जारी की स्वास्थ्य इमरजेंसी की चेतावनी

युद्ध के मैदान से इतर अब एक बड़ा पर्यावरणीय संकट खड़ा हो गया है। ईरान के तेल ठिकानों पर हुए हमलों के बाद आसमान में जहरीले धुएं का गुबार छा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि ईरान और आसपास के इलाकों में ‘ब्लैक रेन’ यानी काली जहरीली बारिश हो सकती है। तेल डिपो में लगी आग से हवा में टॉक्सिक हाइड्रोकार्बन, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन के खतरनाक कण घुल गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश होती है, तो यह रसायन पानी के साथ मिलकर धरती पर गिरेंगे, जिससे कैंसर, सांस की गंभीर बीमारी और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

घरों में कैद होने की सलाह, पर्यावरण पर लंबे समय तक रहेगा असर

WHO ने ईरान के नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें घरों के अंदर रहने और बाहर निकलने पर मास्क का अनिवार्य उपयोग करने को कहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि तेल की आग और धुएं के कारण होने वाला यह प्रदूषण सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हवा के रुख के साथ पड़ोसी देशों की आबोहवा को भी जहरीला बना सकता है। फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ मिसाइलों की गड़गड़ाहट है और दूसरी तरफ जहरीली बारिश का खौफ, जिसने मिडिल ईस्ट को मानवीय त्रासदी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

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