
– एंडोस्कोपी के जरिए कैंसर वाले स्थान पर पहुंचाएंगे दवा
– न्यूरो नेविगेशन से रक्त वाहिकाओं और नसों का बचाव
कानपुर। कैंसर का ख्य़ाल आते ही शरीर में सिरहन बढ़ जाती है। कैंसर का ऑपरेशन होने के बाद भी मरीज दर्द से कराहता है और दिन-रात परेशान रहता है। मर्ज के दर्द को लेकर मरीज रोजाना मौत के लिए मिन्न्त करता है। अब इस दर्द से निजात की उम्मीद है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज सें संबद्ध हैलट अस्पताल की सुपर स्पेशलिटी विंग में अब विभिन्न प्रकार के कैंसर का इलाज संभव है। प्रोस्टेट कैंसर, गाल ब्लैडर कैंसर, पैंक्रियाज कैंसर, लीवर कैंसर, गर्भाशय कैंसर व मलद्वार कैंसर से पीड़ितों के लिए राहत की उम्मीद टिमटिमाई है। सुपर स्पेशलिटी विंग में गंभीर कैंसर का इलाज आधुनिक मशीनों के द्वारा संभव है।
पेन क्लीनिक के जरिए दर्द रफूचक्कर
सुपर स्पेशलिटी (पीएमएसएसवाई) के डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि “पेन क्लीनिक” खोलने का उद्देश्य ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से मरीजों को राहत दिलाना है। उन्होंने बताया कि इस क्लीनिक के जरिए बिना दर्द के कैंसर मरीजो का इलाज संभव है। सुपर स्पेशलिटी विभाग को उपलब्ध कराई गईं अत्याधुनिक रेडियो फ्रीक्वेंसी, फ्लोरोस्कॉपी, स्पाइन एंडोस्कोपी प्लाटी, अल्ट्रासाऊंड गाइडेड प्रोसीजर व न्यूरो नेवीगेशन मशीन के जरिए कैंसर के मुख्य बिंदु को पहचानना मुमकिन है। उदाहरण दिया कि, यदि मरीज की स्पाइन में दर्द है तो आधुनिक एंडोस्कोपी मशीन से मरीज के उस स्थान पर सुई डालकर दर्द वाले स्थान पर दवा भरकर इलाज करते हैं। इस तरीके से मरीज को चीरा नहीं लगाना पड़ता है, नतीजे में मरीज को दर्द से नहीं गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि आने वाले समय में मरीजों के लिए बहुत कारगर साबित होगी।
ट्य़ूमर को कम करने में रेडियो फ्रीक्वेंसी मददगार
डॉ. चन्द्रशेखर ने बताया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी दर्द से राहत दिलाने की न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया है, जो तंत्रिकाओं को निष्क्रिय करके दर्द के संकेतों को रोकती है। साथ ही ट्यूमर को कम करने में मददगार है। आरएफ एब्लेशन ट्यूमर या गांठों के आकार को कम करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी बहुत ही कारगर है। यह त्वचा को कसाव को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। उन्होंने न्यूरो नेविगेशन मशीन के बारे में बताया कि, सर्जरी के दौरान यह सर्जन को “नेविगेट” करने में मदद करती है, जिससे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में मौजूद रक्त वाहिकाओं और नसों जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं को बचाना मुमकिन होता है। उन्होंने सर्जिकल योजना के बारे में समझाया कि, यह सर्जरी से पहले ही सर्जन को योजना बनाने में मदद करती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ ट्यूमर ने सामान्य शारीरिक रचना को बदल दिया हो। इसके साथ ही खोपड़ी की हड्डी के माध्यम से एक सुरक्षित रास्ता खोजने में मदद करती है, जिससे महत्वपूर्ण मस्तिष्क संरचनाओं की रक्षा होती है। मस्तिष्क ट्यूमर को सटीक रूप से खोजने और निकालने में मदद करती है।
voice of india