
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक सरकारी अधिकारी पर गंभीर यौन शोषण, जबरन गर्भपात और विश्वासघात के संगीन आरोप लगे हैं। आबकारी विभाग में तैनात एक महिला सिपाही ने फूड इंस्पेक्टर आदर्श प्रताप पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, गर्भवती होने पर धोखे से गर्भपात कराने और बाद में शादी से मुकरने का आरोप लगाया है। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी मिलने के बाद पीड़िता ने श्रावस्ती पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर न्याय और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है।
सगाई के बाद तय हुई थी शादी की तारीख, भरोसे में बनाए संबंध
पीड़िता के अनुसार, दोनों परिवारों की पूर्ण सहमति और रीति-रिवाजों के साथ उसका रिश्ता फूड इंस्पेक्टर आदर्श प्रताप से तय हुआ था। सगाई की रस्म विधिवत संपन्न होने के बाद आगामी 7 दिसंबर को विवाह की तिथि निर्धारित की गई थी। पीड़िता का आरोप है कि रिश्ता तय होने और शादी की तारीख पक्की होने के बाद आरोपी ने उसे भविष्य का भरोसा दिलाते हुए नजदीकियां बढ़ाईं और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए। पीड़िता इस रिश्ते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी और घर में विवाह की तैयारियां भी चल रही थीं।
गर्भवती होने पर खिलाई दवा, कराया जबरन गर्भपात
महिला सिपाही का आरोप है कि जब उसे अपने गर्भवती होने का पता चला, तो उसने यह बात आदर्श प्रताप को बताई। आरोप के मुताबिक, आरोपी ने बच्चे को जन्म देने से मना कर दिया और कथित तौर पर उसे गर्भपात की दवा खिला दी, जिसके चलते उसका गर्भपात हो गया। इस घटना के बाद आरोपी के व्यवहार में बदलाव आने लगा और जैसे-जैसे तय विवाह की तारीख नजदीक आई, उसने शादी के वादे से साफ इनकार करना शुरू कर दिया।
थाने में मानी गलती, बाहर निकलते ही बयान से पलटा और दी धमकी
पीड़िता का कहना है कि जब उसने मामले की शिकायत स्थानीय थाने में की, तो वहां बातचीत के दौरान आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी। हालांकि, थाने की चौखट से बाहर निकलते ही वह अपने वादे और बयान से मुकर गया। पीड़िता का आरोप है कि जब उसने अदालत और कानून का सहारा लेने की चेतावनी दी, तो आरोपी ने उसे अंजाम भुगतने और जान से मारने की सीधी धमकी दी।
महिला सिपाही ने एसपी से लगाई गुहार, निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़िता ने श्रावस्ती के पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश होकर शिकायती पत्र दिया और आपबीती सुनाई। उसने कहा कि वह खुद वर्दीधारी (आबकारी विभाग) है, इसके बावजूद उसे अपने आत्मसम्मान, न्याय और सुरक्षा के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उसने मामले में तत्काल सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है।
फिलहाल यह मामला पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में है और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायती पत्र के आधार पर आरोपों की गहन जांच की जा रही है। मामले में मेडिकल परीक्षण, साक्ष्यों के संकलन और आरोपी पक्ष का बयान दर्ज होने के बाद ही विधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
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