उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक बिसात पर कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल कर दिया है। लंबे समय से चल रही कयासबाजियों पर विराम लगाते हुए पार्टी हाईकमान ने प्रतापगढ़ के रामपुर खास से तीन बार की विधायक और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद को प्रदेश संगठन में कार्यकारी अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अजय राय की जगह अब आराधना मिश्रा प्रदेश संगठन की कमान संभालेंगी। पार्टी के इस कदम में केवल नेतृत्व परिवर्तन ही नहीं, बल्कि 2027 के चुनावी समर से पहले सधा हुआ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन भी साफ नजर आ रहा है। ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और अति पिछड़े (ईबीसी) समाज को एकजुट कर नया समीकरण साधने की स्पष्ट कोशिश की गई है।
प्रमोद तिवारी की विरासत और ब्राह्मण चेहरा: क्या हैं आराधना मिश्रा के सियासी मायने?
आराधना मिश्रा ‘मोना’ वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की सुपुत्री हैं। रामपुर खास विधानसभा सीट पर तिवारी परिवार का चार दशक से भी ज्यादा समय से अटूट राजनीतिक वर्चस्व रहा है, जहां से खुद प्रमोद तिवारी लगातार नौ बार विधायक चुने गए थे।
पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए आराधना मिश्रा पिछले दो दशक से सक्रिय राजनीति में हैं। वे कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की बेहद करीबी मानी जाती हैं और राज्य में चर्चित रहे ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी।
चुनावी सफर पर नजर डालें तो आराधना मिश्रा ने साल 2014 के उपचुनाव में रामपुर खास से पहली बार विधानसभा का रुख किया था। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 के चुनावों में भी विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद लगातार जीत दर्ज की। अब तक अपने गृह क्षेत्र तक केंद्रित रही उनकी संगठनात्मक क्षमता को कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में विस्तार देने का फैसला किया है।
सपा से तालमेल का गणित और अजय राय की नई भूमिका
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आराधना मिश्रा और उनके पिता प्रमोद तिवारी के समाजवादी पार्टी (सपा) नेतृत्व के साथ हमेशा से मधुर संबंध रहे हैं। कई चुनावों में सपा उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारने से बचती रही है। दूसरी ओर, निवर्तमान अध्यक्ष अजय राय अपनी आक्रामक और मुखर शैली के लिए जाने जाते थे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, गठबंधन की राजनीति को सहज बनाए रखने के साथ ही इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर आक्रामकता और संतुलन दोनों को साधा गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अजय राय को पार्टी की राष्ट्रीय टीम में शामिल करने का भरोसा दिया है। वहीं, अजय राय ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव वाराणसी की पिंडरा सीट से लड़ने की तैयारी जताई है।
इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बना पश्चिमी यूपी पर फोकस
सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को संगठन में मजबूत आवाज दी है। इमरान मसूद पश्चिमी क्षेत्र में पार्टी का सबसे कद्दावर मुस्लिम चेहरा हैं। चूंकि वह समय-समय पर सपा को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं, ऐसे में उनका यह पद कांग्रेस की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन को मजबूत रखने का संकेत भी देता है।
दलित और अति पिछड़ा वर्ग को भी संगठन में बड़ा प्रतिनिधित्व
कांग्रेस ने नई टीम में केवल अगड़े और अल्पसंख्यक वर्ग पर ही भरोसा नहीं जताया, बल्कि दलित और अति पिछड़े वर्ग (ईबीसी) को भी सीधे तौर पर जोड़ा है। महराजगंज से आने वाले दलित नेता आलोक प्रसाद को संगठन में सीनियर उपाध्यक्ष बनाया गया है।
इसके साथ ही, पूर्वी उत्तर प्रदेश में फिशरमेन कांग्रेस के अध्यक्ष रहे देवेंद्र निषाद को उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि पहले देवेंद्र निषाद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं थीं, लेकिन अंततः उन्हें उपाध्यक्ष बनाकर ईबीसी वर्ग, विशेषकर निषाद समुदाय को सीधा प्रतिनिधित्व दिया गया।
सोशल इंजीनियरिंग: क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का नया फॉर्मूला
नई संगठनात्मक संरचना को देखने पर कांग्रेस का सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साफ तौर पर उभरता है:
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आराधना मिश्रा ‘मोना’: ब्राह्मण चेहरा, पूर्वांचल से प्रतिनिधित्व
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इमरान मसूद: मुस्लिम चेहरा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रतिनिधित्व
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आलोक प्रसाद: दलित चेहरा, महराजगंज (पूर्वांचल) से प्रतिनिधित्व
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देवेंद्र निषाद: अति पिछड़ा (ईबीसी) चेहरा, निषाद समाज और पूर्वांचल से प्रतिनिधित्व
ब्राह्मण समाज और एंटी-बीजेपी नैरेटिव को साधने की रणनीति
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के लिए ब्राह्मण वर्ग के बीच अपनी पैठ दोबारा बनाना एक अहम चुनौती रहा है। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर आराधना मिश्रा की ताजपोशी को पार्टी की इसी रणनीति का मुख्य हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व का आकलन है कि सत्ता पक्ष से जुड़े असंतोष के बीच ब्राह्मण वर्ग एक मजबूत विकल्प की तलाश में है। ऐसे में पार्टी आराधना मिश्रा के जरिए उस असंतोष को अपने पक्ष में भुनाना चाहती है, जबकि प्रदेश प्रभारी पद पर दलित नेतृत्व (राजेंद्र पाल गौतम) और कार्यकारी अध्यक्ष पद पर इमरान मसूद के जरिए दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण के पुराने ऐतिहासिक जनाधार को दोबारा खड़ा करने की कवायद चल रही है। राहुल गांधी की निगरानी में तैयार किए गए इस नए फॉर्मूले से 2027 के चुनाव से पहले संगठन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
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