Tuesday , 15 September 2026

यूपी चुनाव 2027: जातिगत चक्रव्यूह, Gen-Z का रुख और भीतरघात; BJP ने लखनऊ मंथन में तलाशे सियासी काट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सियासी बिसात बिछाने की कवायद तेज कर दी है। लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों ने वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठक कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और सह-प्रभारी जगदीश ईश्वर भाई पटेल की अगुवाई में हुई इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पार्टी के सामने उभरती चुनौतियों पर विस्तार से मंथन हुआ। बैठक के केंद्र में विपक्ष का जातीय नैरेटिव, युवाओं का असंतोष, पार्टी का आंतरिक कलह और सरकार-संगठन के बीच का सामंजस्य जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

PDA के जातीय चक्रव्यूह को भेदने की रणनीति

बैठक में यह साफ तौर पर रेखांकित किया गया कि 2027 के रण में विपक्ष एक बार फिर जातीय ध्रुवीकरण के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश करेगा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष द्वारा गढ़े गए ‘पीडीए’ और ‘संविधान’ जैसे विमर्शों से मिले नुकसान को भांपते हुए भाजपा ने अपने सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधने का खाका तैयार किया है। पार्टी के भीतर विभिन्न जातियों के बीच समय-समय पर उभरने वाले मतभेदों को बड़ी चुनौती माना गया। विशेष रूप से क्षत्रिय, ब्राह्मण, कुर्मी और लोध जैसे प्रमुख सामाजिक वर्गों के बीच आपसी तालमेल मजबूत करने और किसी भी तरह की नाराजगी को जमीनी स्तर पर दूर करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

रोजगार, Gen-Z और Gen-Alpha को साधने पर जोर

चुनावी समर में इस बार सबसे बड़ा फोकस युवा मतदाताओं पर केंद्रित रहेगा। बैठक में हाल के दिनों में उभरे छात्र-युवा आंदोलनों और रोजगार के मुद्दे पर युवाओं के बीच बन रहे नकारात्मक माहौल को लेकर चिंता जाहिर की गई। भाजपा के सामने Gen-Z और Gen-Alpha जैसी नई पीढ़ी के मतदाताओं को विपक्ष के नैरेटिव से दूर रख पार्टी की नीतियों से जोड़ने की गंभीर चुनौती है। पार्टी नेताओं ने जोर दिया कि रोजगार सृजन, शिक्षण संस्थानों में संवाद और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार व संगठन को अपनी सक्रियता दोगुनी करनी होगी।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सहयोगी दलों का दबाव

संगठन की मजबूती के लिए कार्यकर्ताओं की अनदेखी और उनकी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने पर बल दिया गया। बैठक में स्वीकार किया गया कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के बिना चुनावी विजय संभव नहीं है। कार्यकर्ताओं की बात को सीधे शासन तक पहुंचाने और प्रशासनिक स्तर पर उनकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, चुनाव करीब आते ही एनडीए के सहयोगी दलों द्वारा की जाने वाली दबाव की राजनीति को भी रेखांकित किया गया। नेतृत्व ने साफ किया कि सीट बंटवारे से लेकर स्थानीय स्तर के मुद्दों तक सहयोगियों के साथ संवाद की निरंतरता बनाए रखी जाए।

मोर्चा-प्रकोष्ठों का जल्द विस्तार, भव्य आयोजन की तैयारी

संगठन को चुनावी मोड में लाने के लिए प्रदेश कार्यसमिति, विभिन्न मोर्चा और प्रकोष्ठों के गठन की प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करने को कहा गया है। संगठन विस्तार की इस प्रक्रिया के संपन्न होते ही राजधानी में एक विशाल और भव्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अथवा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आमंत्रित करने पर सहमति बनी है, जिससे कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार किया जा सके।

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