Tuesday , 22 September 2026

युवराज मनचंदा हत्याकांड की आरोपी अन्या वत्स पर नया शिकंजा: पूर्व R&AW चीफ की भांजी बताकर 1.25 करोड़ की ठगी, दिल्ली में FIR दर्ज

गुरुग्राम में चर्चित 31 वर्षीय युवराज मनचंदा हत्याकांड की प्रमुख आरोपी अन्या वत्स की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। राजधानी दिल्ली के संसद मार्ग थाने में अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा के खिलाफ 1.25 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और जबरन वसूली का संगीन मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित अखिलेश गोयल का आरोप है कि आरोपियों ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के नाम पर फर्जी नोटिस भेजकर, सरकारी अधिकारियों की झूठी पहचान बताकर और गंभीर कानूनी धाराओं का भय दिखाकर उनसे यह मोटी रकम ऐंठी है।

ईडी नोटिस का खौफ और बड़े रसूख का दावा

शिकायत के मुताबिक, 3 सितंबर 2024 को पीड़ित को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का कथित समन भेजा गया, जिसमें उन्हें और उनकी पत्नी को जांच एजेंसी के सामने पेश होने का निर्देश था। घबराहट के माहौल के बीच अन्या वत्स और संयम सचदेवा ने पीड़ित से संपर्क किया और दावा किया कि उनकी पहुंच सीधे मंत्रालयों और शीर्ष जांच एजेंसियों तक है। अन्या ने खुद को पूर्व रॉ (R&AW) प्रमुख और पूर्व आईपीएस अधिकारी सामंत गोयल की भांजी बताया, जबकि रॉ के संयुक्त सचिव अनिल गुप्ता को अपना स्थानीय अभिभावक बताया। इसके बाद पीड़ित को पीएमएलए (PMLA), एनडीपीएस (NDPS) और यूएपीए (UAPA) जैसे कड़े कानूनों में फंसाने व तत्काल गिरफ्तारी का खौफ दिखाया गया।

बचत और कर्ज के 1.25 करोड़ रुपये बैंक खातों में कराए ट्रांसफर

अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच आरोपियों ने मामले को दबाने और सरकारी एजेंसियों को ‘पेनाल्टी व सेटलमेंट’ देने का झांसा देकर अलग-अलग किस्तों में लगभग 1.25 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित अखिलेश गोयल ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, परिजनों व मित्रों से उधार और बैंकों से ऋण लेकर यह राशि जुटाई, जिसे मुख्य तौर पर अन्या वत्स के एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया। आरोपियों ने ईडी (ED), गृह मंत्रालय (MHA), रॉ (R&AW) और एनआईए (NIA) के फर्जी लेटरहेड, सील और ई-मेल आईडी का उपयोग कर सरकारी कार्रवाई का पूरा स्वांग रचा था।

फर्जी ‘क्लोजर ई-मेल’ और फिर 30 करोड़ की भारी-भरकम मांग

साजिश यहीं नहीं थमी; अलग-अलग नंबरों से कथित सरकारी अफसर बनकर पीड़ित को फोन किए जाते रहे। 29 नवंबर 2024 को अन्या वत्स की तरफ से एक ई-मेल भेजकर दावा किया गया कि सभी केस बंद करा दिए गए हैं और इसके एवज में करीब 96.89 लाख रुपये तथा 1 लाख अतिरिक्त खर्च की मांग की गई। इसके बाद 4 अगस्त 2025 को भेजे एक अन्य ई-मेल में आरोपी ने दावा किया कि उसने सरकारी एजेंसियों को पीड़ित की तरफ से 13.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और अब पीड़ित पर 26 करोड़ रुपये बकाया निकलते हैं। हालांकि, इन कथित भुगतानों का कोई वैध चालान या सरकारी रसीद कभी नहीं दी गई।

दिवाली से पहले धमकी और 15 अगस्त को संसद मार्ग थाने में केस दर्ज

रकम न मिलने पर आरोपियों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पीड़ित को व्हाट्सएप पर धमकी भरे संदेश भेजे, जिसमें दिवाली से पूर्व 30 करोड़ रुपये चुकाने और तत्काल 15 लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया। परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। आखिरकार, पीड़ित ने दिल्ली पुलिस से गुहार लगाई। संसद मार्ग थाना पुलिस ने 15 अगस्त 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब व्हाट्सएप चैट, बैंक लेनदेन, फर्जी सरकारी नोटिस और आईपी एड्रेस की गहन तकनीकी जांच कर रही है।

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