मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने मोर्चा पूरी तरह खोल दिया है। ‘वोट चोरी’ और चुनावी कार्यप्रणाली के विरोध में एकजुट हुआ विपक्ष आज राजधानी दिल्ली में सड़कों पर उतरकर सीधे सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च निकालेगा। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत से मुलाकात कर अपनी बात रखना चाहते थे, हालांकि सीजेआई ने इस मामले पर मिलने से साफ मना कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह से जुड़े मामले पहले से ही शीर्ष अदालत में विचाराधीन हैं।
इस विरोध मार्च की अगुवाई राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव करेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत, एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले, सीपीआई के डी राजा, सीपीएम नेता एमए बेबी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी एकजुटता दिखाते हुए इस सुप्रीम कोर्ट मार्च का हिस्सा बनेंगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशन सील
संसद मार्ग और लुटियंस दिल्ली में विपक्षी दलों के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सख्त ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक छह प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट पूरी तरह बंद रखने की घोषणा की है। इनमें पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और बाराखंभा रोड मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। हालांकि डीएमआरसी ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुविधा के लिए इन सभी स्टेशनों पर लाइनों को बदलने यानी इंटरचेंज की सुविधा सामान्य दिनों की तरह जारी रहेगी।
क्या थीं विपक्ष की मांगें, क्यों मांगा था सीजेआई से समय?
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे दोनों ने सीजेआई सूर्य कांत को आधिकारिक पत्र भेजकर आज शाम 4 से 5 बजे के बीच मिलने का वक्त मांगा था। विपक्षी नेताओं का इरादा सीजेआई को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर ‘वोट चोरी’ रोकने, सीईसी ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया को रद्द करने और चुनावों में दोबारा बैलेट पेपर प्रणाली लागू करने की मांग उठाने का था।
मुलाकात के अनुरोध पर क्या बोले सीजेआई सूर्य कांत?
विपक्षी नेताओं के आग्रह पर सीजेआई सूर्य कांत ने रविवार को स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसा कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक दायरे में कार्यपालिका के सामान्य कामकाज में सीधे दखल नहीं दे सकता। सीजेआई ने कांग्रेस नेतृत्व को सलाह दी कि वे इस विषय को लेकर अदालत के न्यायिक पक्ष में विधिवत याचिका दाखिल करें, जिस पर मंगलवार को सुनवाई संभव है। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए दोहराया कि यदि देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे जनता के लिए चौबीसों घंटे और सातों दिन खुले हैं।
‘चलो दिल्ली – लोकतंत्र के लिए मार्च’ का रोडमैप
कांग्रेस ने आज के इस व्यापक आंदोलन को “चलो दिल्ली – लोकतंत्र के लिए मार्च” नाम दिया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, तमाम विपक्षी नेता, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि और छात्र दोपहर 1.30 बजे कनॉट प्लेस-बाराखंबा रोड जंक्शन पर जुटेंगे और वहां से सुप्रीम कोर्ट की ओर कूच करेंगे।
राहुल गांधी का तीखा हमला: ‘डरपोक लोग भारत की आवाज नहीं दबा सकते’
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट तक का यह मार्च पार्टी, जाति, लिंग, क्षेत्र और समुदाय की सीमाओं से परे होकर निकाला जा रहा है। राहुल ने शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि कल युवा दिल में प्यार लेकर निकले थे, लेकिन पुलिस और भाजपा के गुंडों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की। यह वह भारत बिल्कुल नहीं है जिसे हम सब चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए कहा कि ये डरपोक लोग भारत की बुलंद आवाज को दबा नहीं सकते, इन्हें जनभावनाओं के आगे झुकना ही होगा।
विजय चौक से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खिंची सियासी लकीर
इससे पहले शुक्रवार को भी विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं ने संसद भवन से विजय चौक तक पैदल मार्च निकालकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी चिंताओं से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपा था। वहीं बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने पूरे देश में भय और अराजकता का माहौल बना रखा है और देश में एक अघोषित आपातकाल की स्थिति पैदा कर दी गई है।
दिल्ली में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती
खरगे ने शनिवार को दिल्ली में आंदोलनकारियों को रोकने के लिए किए गए कड़े बंदोबस्त पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 32,000 दिल्ली पुलिस के जवानों और 7,500 सीआरपीएफ जवानों को तैनात किया गया था। यह भारी तैनाती साफ दर्शाती है कि केंद्र सरकार देश के युवाओं के आंदोलन से कितनी सहमी हुई है। उन्होंने कहा कि हम सीजेआई के सामने कोई मांग थोपने नहीं जा रहे, बल्कि हाथ जोड़कर उनसे लोकतंत्र की रक्षा की गुहार लगाने का वक्त मांगा था।
विपक्षी नेताओं का केंद्र पर तीखा हमला
एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों, मलयालम प्रेस के संवाददाताओं, स्वतंत्र ब्लॉगर्स और महिला यूट्यूबरों तक को हिरासत में लेकर बदसलूकी की गई, जो बेहद शर्मनाक है। वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि छात्रों, युवाओं और राजनेताओं की आवाज कुचलने के लिए पुलिस बल का क्रूर दुरुपयोग लोकतंत्र की बुनियाद को हिलाने वाला है। उन्होंने कहा कि सत्ता के नशे में संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा गिराना और देश की लोकतांत्रिक साख को नुकसान पहुंचाना देशद्रोह जैसा है।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों से गरमाया मामला
विपक्ष के इस आक्रामक तेवर की पृष्ठभूमि ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट से जुड़ी है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर अंदरूनी टकराव का दावा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के निर्णयों पर रिकॉर्ड पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (एसआईआर) की प्रक्रिया भी शामिल थी। इसी खुलासे के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन ने साझा रणनीति तैयार करते हुए देशव्यापी स्तर पर रैलियों और विरोध मार्च का बिगुल फूंका है।
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