
काठमांडू : हिमालयी देश नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस भीषण प्राकृतिक आपदा से देश को करीब 400 अरब नेपाली रुपये की भारी आर्थिक क्षति पहुंची है। अब तक 1,344 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 5,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव दल लगातार जुटे हुए हैं। इस त्रासदी का सीधा और गंभीर असर अब नेपाल की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन उद्योग पर पड़ने लगा है।
पीक टूरिस्ट सीजन में बुकिंग रद्द, होटलों को भारी झटका
सितंबर से नवंबर का समय नेपाल में ट्रेकिंग और पर्यटन का सबसे प्रमुख (पीक) सीजन माना जाता है, लेकिन बाढ़ के खौफ ने विदेशी पर्यटकों के कदम रोक दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होटल और ट्रैवल कंपनियों के पास पूर्व-निर्धारित बुकिंग्स के धड़ाधड़ रद्दीकरण (कैंसिलेशन) आ रहे हैं। काठमांडू के प्रमुख होटलों में करीब 20 प्रतिशत तक की बुकिंग रद्द हो चुकी है। होटल संचालकों का कहना है कि आपदा के बाद के एक हफ्ते के भीतर खासकर ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिए कराई गई बुकिंग में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।
ग्लेशियल झीलों का खतरा: 50 करोड़ डॉलर का जल निकासी प्रोजेक्ट
इस प्रलयंकारी आपदा ने नेपाल में ग्लेशियल झीलों के फटने (GLOF) के खतरे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। खतरे को भांपते हुए नेपाल सरकार चार अति-संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का जलस्तर घटाने के लिए 50 करोड़ डॉलर की लागत वाली परियोजना पर काम कर रही है। इसमें कोशी और गंडकी बेसिन की प्रमुख झीलें—सोलुखुम्बु की लुमडिंग त्शो और होंगु-2, संखुवासभा की लोअर बरुण और मनांग की थुलागी (डोना) झील शामिल हैं। पर्यावरण वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है कि केवल पानी निकालना पर्याप्त समाधान नहीं है; इसके लिए रियल-टाइम अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, बहाव नियंत्रण और संवेदनशील नदी मार्गों पर अनियंत्रित निर्माण रोकने जैसे बहुआयामी उपाय जरूरी हैं। ज्ञात हो कि आईसीआईएमओडी (ICIMOD) और यूएनडीपी (UNDP) की रिपोर्ट में चिन्हित 47 अत्यधिक खतरनाक झीलों में से 21 अकेले नेपाल में स्थित हैं।
13 हजार से अधिक का रेस्क्यू, सरकार ने शुरू किया ‘नेपाल कॉलिंग’ अभियान
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, युद्धस्तर पर चलाए गए अभियानों के तहत अब तक 13,101 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लापता 5 हजार नागरिकों की खोज के लिए अभियान जारी है। वहीं, पर्यटकों के बीच फैले भ्रम को दूर करने के लिए नेपाल सरकार ने ‘#NepalCalling’ नाम से एक वैश्विक जागरूकता अभियान शुरू किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संपूर्ण नेपाल आपदाग्रस्त नहीं है; काठमांडू, पोखरा, चितवन, लुंबिनी, जनकपुर के साथ-साथ अन्नपूर्णा और एवरेस्ट जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्र तथा सभी हवाई अड्डे पूरी तरह सुरक्षित और संचालित हैं। केवल लांगटांग, गोसाइंकुंडा, हेलंबू सर्किट और तामांग हेरिटेज ट्रेल जैसे कुछ सीमित ट्रेक रूट ही एहतियातन बंद या प्रभावित हैं।
बुनियादी ढांचे को भयंकर चोट: 7570 घर तबाह, 105 पुल टूटे और बिजली संकट
आपदा के चलते नेपाल का आधारभूत ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है। NDRRMA की रिपोर्ट के मुताबिक, 7,570 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, 55 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें ध्वस्त हो चुकी हैं, जबकि 37 सड़क पुल और 68 सस्पेंशन (झूला) पुल बह गए हैं या गंभीर रूप से टूटे हैं। इसके अतिरिक्त 1,806 हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो गई है। ऊर्जा क्षेत्र में 13 जलविद्युत परियोजनाएं, एक सौर ऊर्जा संयंत्र और दो मुख्य ट्रांसमिशन लाइनें प्रभावित होने से लगभग 783 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता बाधित हुई है। आपदा प्रभावितों के त्वरित बचाव, पुनर्वास और तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आगामी 6 महीनों में कम से कम 8 अरब नेपाली रुपये के आपातकालीन बजट की आवश्यकता रेखांकित की गई है।
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