
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा सियासी हमला बोला है। अखिलेश यादव ने यूसीसी को जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने वाला चुनावी हथकंडा करार दिया। उन्होंने यूसीसी की एक नई परिभाषा गढ़ते हुए कहा कि भाजपा के इस कदम का असली मतलब ‘अंडरग्राउंड कम्युनल कॉन्सपिरेसी’ यानी भूमिगत सांप्रदायिक षड्यंत्र है। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नए जुमले उछालने से पहले जनता के हर खाते में 15 लाख रुपये भेजने और सालाना दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने के अपने पुराने वादों का हिसाब दे।
यूपी में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त, भ्रष्टाचार चरम पर अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और नौकरशाही पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश का भविष्य संवारने और लोकतंत्र को बचाने के लिए भाजपा को सत्ता से बेदखल करना बेहद जरूरी हो चुका है। राज्य की समूची प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह चौपट हो चुकी है और सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं टूट गई हैं। जनता अब इस कुशासन से निजात चाहती है और भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकना ही राज्य की भलाई का एकमात्र रास्ता बचा है।
पीडीए की ताकत से होगा भाजपा का सूपड़ा साफ सपा मुखिया ने आगामी चुनावी रणनीतियों का जिक्र करते हुए जोर दिया कि समाजवादी पार्टी ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग को एकजुट कर यूपी से भाजपा का पूरी तरह सफाया करने के संकल्प पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने दम पर कोई भी नई जनकल्याणकारी योजना धरातल पर उतारने में नाकाम रही है। आज भी जनता के सामने फीता काटने और वाहवाही लूटने के लिए सरकार के पास केवल समाजवादी पार्टी के शासनकाल में शुरू किए गए विकास कार्य ही मौजूद हैं।
महिला अपराध और हिरासत में मौतों पर सरकार को घेरा अखिलेश यादव ने राज्य में बढ़ते अपराधों का हवाला देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब से सूबे में भाजपा की सरकार आई है, उत्तर प्रदेश फर्जी एनकाउंटर, पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले में शीर्ष पायदान पर पहुंच गया है। सरकार अपनी इन गंभीर विफलताओं को छुपाने के लिए ही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और नए-नए विवादित मुद्दों को हवा दे रही है।
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