Sunday , 12 July 2026

जिनपिंग की सीक्रेट चिट्ठी… जानिए कैसे ट्रंप टैरिफ के बीच सुधर गए भारत-चीन के रिश्ते !

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक चिट्ठी लिखी थी। इसमें उन्होंने अमेरिका-भारत सौदों से चीन के हितों को हो सकने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी। यह दावा ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में किया गया है।

दरअसल, मार्च में जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प चीन के खिलाफ अपने व्यापार युद्ध को और तेज कर रहे थे, तभी बीजिंग ने भारत से गुपचुप तरीके से संपर्क साधना शुरू कर दिया था।

चिट्ठी के जरिए उन्होंने दोनों देशों के संबंधों में सुधार की संभावनाएं टटोली थीं। इसके बाद ही दोनों देशों के संबंध बेहतर होने शुरू हुए। इसके कुछ महीने बाद मोदी के चीन जाने का प्लान बना।

PM मोदी तक पहुंचाई गई चिट्ठी

रिपोर्ट में एक भारतीय अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि यह चिट्ठी PM मोदी तक भी पहुंचाई गई थी, ताकि वे इस बात का आकलन कर सकें कि रिश्तों को बेहतर बनाने की कितनी संभावनाएं हैं।

चिट्ठी में चीन ने खास तौर पर इस चिंता को जताया था कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला कोई भी समझौता चीन के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें में यह भी लिखा गया था कि बीजिंग की ओर से संबंध सुधारने की कोशिशों का नेतृत्व एक प्रांतीय अधिकारी करेगा।

दो फैसलों से बढ़ी भारत की नाराजगी

ब्लूमबर्ग का कहना है कि जून तक भारत ने जिनपिंग की चिट्ठी का कोई ठोस जवाब नहीं दिया था, लेकिन तब हालात तेजी से बदले भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत विवादों में फंस गई।

मैगजीन ने इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया कि भारत खास तौर पर दो बातों से नाराज था। पहले तो ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान में सीजफायर कराया, जिसे भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था।

भारत की स्थिति को कमजोर करने की कोशिशों से मोदी सरकार पहले ही नाराज थी, फिर इसके बाद भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया गया।

इन दोनों फैसलों ने भारत-अमेरिका संबंधों में असंतोष और तनाव को हवा दी थी। इसके बाद भारत ने जून में चीन की ओर से आई पहल का गंभीरता से जवाब देना शुरू किया।

7 साल बाद चीन जा रहे PM मोदी इसके बाद हालात तेजी से बदले। अगस्त आते-आते भारत और चीन ने 2020 के गलवान घाटी संघर्ष से आगे बढ़ने के लिए सीमा विवाद सुलझाने की कोशिशों को दोगुना करने पर सहमति जताई। और अब PM मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर जा रहे हैं।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी मानती है कि ट्रम्प के टैरिफ से पहले ही भारत और चीन गंभीर बातचीत में जुटे हुए थे। पिछले साल दोनों देशों ने लद्दाख में जारी गतिरोध को आंशिक तौर पर हल करने के लिए एक समझौता किया था। इसी समझौते ने मोदी और शी जिनपिंग की पहली सीधी मुलाकात का रास्ता खोला।

अब प्रधानमंत्री मोदी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के लिए चीन जा रहे हैं। वहां उनकी मुलाकात जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से होगी। इस मुलाकात को अमेरिका कड़ी नजर से देख रहा है, क्योंकि यह उसके लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकता है।

इकोनॉमी बेहतर करने के लिए चीन से बेहतर रिश्ते जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन से बेहतर संबंध करने को लेकर भारत में पिछले साल से ही माहौल बनना शुरू हो गया था। जनवरी 2024 में ही मोदी सरकार ने सोचना शुरू कर दिया था कि अगर चीन से रिश्ते सुधरें तो डगमगाती अर्थव्यवस्था को मदद मिल सकती है, क्योंकि 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर सेना तैनात रखने में बहुत खर्च हो रहा था।

2023 के बीच तक दोनों देशों ने सीमा पर सैनिक हटाने पर काफी हद तक सहमति बना ली थी, लेकिन कुछ विवादों के कारण यह समझौता टिक नहीं पाया। उसी साल जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी-शी की बैठक भी टल गई थी।

फिर मार्च 2025 में शी जिनपिंग का पत्र आया और बीजिंग ने सार्वजनिक तौर पर भारत-चीन रिश्तों को ‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ कहना शुरू कर दिया था। उनके उपराष्ट्रपति हान झेंग समेत कई नेताओं ने इसी शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ एक रूपक है। यहां ड्रैगन से मतलब चीन और एलिफेंट भारत है। जबकि टैंगो एक तरह का डांस है, जिसमें दोनों पार्टनर एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर चलते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जो चीन के शीर्ष नेतृत्व से सीधे संपर्क में रहते हैं, इस पूरी प्रक्रिया के अहम चेहरा बने। उन्होंने पिछले महीनों में चीन की यात्राएं कीं और बातचीत को आगे बढ़ाया।

जुलाई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी बीजिंग गए और अपने समकक्ष वांग यी से मिले। यह पांच सालों में पहली मुलाकात थी। जयशंकर ने चीन से व्यापार पर लगाए जा रहे प्रतिबंध और सप्लाई चेन को बाधित करने वाली नीतियां खत्म करने की अपील की। चीन ने इस दौरान भारत को उर्वरक और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों का व्यापार जगत भी सुधरते रिश्ते का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। अडानी समूह चीन की इलेक्ट्रिक वाहन दिग्गज BYD के साथ साझेदारी करने की योजना देख रहा है, ताकि भारत में बैटरी उत्पादन शुरू किया जा सके। इसी तरह रिलायंस और JSW समूह भी चीनी कंपनियों से गुप्त समझौते कर रहे हैं।

एक्सपर्ट बोले- ट्रम्प की वजह से भारत-चीन नजदीक आए

ब्लूमबर्ग लिखता है कि भारत और चीन की नजदीकी का असर सीधे अमेरिका पर पड़ रहा है। पिछले कुछ दशकों में वॉशिंगटन लगातार नई दिल्ली को अपने साथ जोड़कर बीजिंग का मुकाबला करना चाहता था, लेकिन ट्रम्प ने अचानक भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया, जिससे मोदी सरकार हैरान रह गई और दिल्ली ने बीजिंग की ओर रुख करना शुरू किया।

अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के विशेषज्ञ एशले टेलिस ने तंज कसा कि “ट्रम्प असली शांतिदूत निकले, जिन्होंने भारत और चीन को करीब ला दिया, क्योंकि उन्होंने भारत को दुश्मन की तरह ट्रीट किया।”

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